हिसार। बहुचर्चित फ्यूचर मेकर कंपनी से जुड़े 54 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी गड़बड़ी मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। कंपनी के सीएमडी राधेश्याम और एमडी बंसीलाल की पेशी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राजीव की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई। दोनों आरोपी फिलहाल केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
सुनवाई के दौरान जीएसटी विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर की दोबारा गवाही दर्ज की गई, लेकिन दूसरी बार भी गवाही पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने अगली सुनवाई 27 फरवरी तय की है, जिस दिन तीसरी बार गवाही कराई जाएगी। गंभीर आरोपों और भारी बकाया राशि को देखते हुए ट्रायल कोर्ट पहले ही दोनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर चुका है। इसके बाद आरोपियों ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार आयकर विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि कंपनी देशभर में लोगों को सदस्य बनाने के नाम पर प्रति सदस्य 3750 रुपये शुल्क लेती थी और बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाकर करोड़ों रुपये जुटाए गए। आरोप है कि इस राशि पर देय जीएसटी जमा नहीं कराया गया और कंपनी पर 54 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। विभाग की ओर से कई नोटिस भेजे गए, लेकिन न संतोषजनक जवाब मिला और न ही राशि जमा कराई गई। इसके बाद विभाग ने कानूनी कार्रवाई तेज करते हुए जमानती वारंट जारी किए।
वारंट के बाद किया था आत्मसमर्पण
वारंट जारी होने के बाद राधेश्याम और बंसीलाल ने 10 नवंबर को अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अभियोजन पक्ष ने दलील दी थी कि आरोप गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े हैं और बड़ी राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं कराई गई है। ऐसे में जमानत मिलने पर जांच और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।