हिसार। हांसी-हिसार जिले में 1.96 लाख एकड़ में धान की फसल के पराली प्रबंधन के लिए 505 नोडल अधिकारी जिम्मेदारी संभालेंगे। अधिकारी किसानों से संपर्क कर उन्हें पराली प्रबंधन के तरीके बताएंगे और समस्याओं का समाधान कराने में सहयोग करेंगे।
धान की खेती वाले दोनों जिलों के 229 गांवों में पराली जलाने वालों की पहचान के लिए 229 ग्राम स्तरीय टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें 16 सितंबर से 30 नवंबर तक निगरानी करेंगी। कृषि विभाग ने पराली जलाने के एक्टिव फायर लोकेशन (एएफएल) मामलों के लिए शून्य लक्ष्य निर्धारित किया है।
पराली जलाने वाले किसानों की मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री की जाएगी। साथ ही किसान पर जुर्माना लगाने के अलावा एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। पिछले वर्षों में पराली जलाने के मामलों के आधार पर गांवों को ग्रीन, येलो और रेड जोन में बांटा गया है। हांसी-हिसार में गांव बास आजमशाहपुर को रेड जोन में रखा गया है, जबकि 11 गांव येलो और 217 गांव ग्रीन जोन में शामिल हैं।
ग्रीन जोन में 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तथा येलो और रेड जोन में 50 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। कृषि, राजस्व, पशुपालन और बागवानी विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी किसानों को पराली प्रबंधन के तरीकों की जानकारी देने के साथ इसके प्रबंधन में सहयोग करेंगे।
सहायक कृषि अभियंता गोपीराम सांगवान ने बताया कि रेड से ग्रीन जोन में आने वाले गांव को 1.5 लाख रुपये और येलो से ग्रीन जोन में आने वाले गांव को एक लाख रुपये दिए जाएंगे।
नुक्कड़ सभाएं और जागरूकता कार्यक्रमों में पराली जलाने के बताएंगे नुकसान :
कृषि विभाग ने हांसी में 60 किसान नुक्कड़ सभाएं और 60 स्कूल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। हिसार में 40 किसान नुक्कड़ सभाएं और 40 स्कूल जागरूकता कार्यक्रम होंगे। इनमें किसानों और विद्यार्थियों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान तथा सरकार की ओर से दी जा रही सहायता की जानकारी दी जाएगी। हांसी में जिलास्तरीय कार्यक्रम भी होगा जिसमें चयनित किसान और अधिकारी शामिल होंगे।
-
हिसार और हांसी में धान बिजाई एवं प्रशासनिक श्रेणीवार विवरण
श्रेणी हिसार हांसी
धान वाले गांव 172 57
धान का रकबा (एकड़ में) 95,925 1,01,357
धान बिजाई वाले किसान 21,915 20,168
नियुक्त नोडल अधिकारी 295 210
रेड जोन गांव 0 1
येलो जोन गांव 4 7
ग्रीन जोन गांव 168 49
पराली जलाने के केस
वर्ष 2024- 49
वर्ष 2025-70
क्या बोले पराली जलाने वाले किसान...
खेत को जल्दी खाली करने के लिए पराली को जला दिया था। कृषि विभाग ने रेड इंट्री करा दी थी जिससे उनकी गेहूं की फसल मंडी में नहीं बिकी। मंडी गेट पास के लिए आवेदन किया तो रद्द हो गया। दो सीजन तक फसलों पर यह प्रतिबंध रहेगा। -रामकंवार, बरवाला
मेरे खेत में किसी ने आग लगा दी थी। अधिकारियों ने एफआईआर के साथ रेड इंट्री भी दर्ज करा दी। इससे वह धान और गेहूं को मंडी में नहीं बेच पाए। गांव में ही कम रेट में दोनों फसलों को बेचना पड़ा। अगले साल हमारी रेड इंट्री खत्म होगी। राकेश, निवासी, बास
-
मेरे खेत में दूसरे खेत से आग लग गई थी। इस बारे में कृषि अधिकारियों को बताया तो भी उनकी रेड इंट्री करा दी। कृषि विभाग की ओर से जुर्माना भी लगाया गया था। जुर्माना तो मौके पर ही भरवा दिया गया था। अधिकारियों को पहले सच्चाई जाननी चाहिए। - आजाद सिंह, डाटा
.......
कृषि विभाग की ओर से नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं। नोडल अधिकारी किसानों को पराली प्रबंधन के बारे में जानकारी देंगे। पराली जलाने के मामलों में सेटेलाइट से निगरानी की जाएगी। कहीं पर भी एएफल (सक्रिय अग्नि स्थल) की रिपोर्ट मिली तो कमेटी मौके पर जाकर जांच करेगी। पराली जलाने वालों के खिलाफ एफआईआर होगी, उनकी रेड इंट्री तथा जुर्माने का प्रावधान भी है।
बाबूलाल, उप निदेशक , कृषि विभाग हिसार