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नोटबंदी के पहले 22 दिन में पौने दो करोड़ का राजस्व घाटा

Wed, 14 Dec 2016 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
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नई गाइडलाइन के बाद भीड़ हुई कम - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के कारण नवंबर माह के 22 दिन में हिसार को करीब पौने दो करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो गया। दिसंबर माह में राजस्व में चार करोड़ रुपये तक की गिरावट आने की आशंका है। तहसील कार्यालयों में रजिस्ट्री न होने के कारण राजस्व का यह नुकसान हुआ।
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8 नवंबर को 500-1000 के नोट बंद किए गए थे। इसके बाद प्रॉपर्टी बाजार में अत्याधिक गिरावट आई। जिले में औसतन 94 रजिस्ट्री होती थी। नोटबंदी के बाद यह संख्या एक तिहाई से भी कम हो गई। अक्तूबर महीने में जिले में कुल 2839 रजिस्ट्री हुई, जिससे प्रशासन को स्टांप ड्यूटी से 4 करोड़ 68 लाख 13 हजार 225 रुपये का राजस्व मिला। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन से 72 लाख 26 हजार 994 रुपये मिले। यानी अक्तूबर में तहसील कार्यालयों से रजिस्ट्री में 5 करोड़ 40 लाख 40 हजार 219 रुपये मिले थे।
नवंबर माह में शुरू के 8 दिन सामान्य दिनों की तरह रजिस्ट्री होती रही। इसके बाद के 22 दिन रजिस्ट्री की संख्या बेहद कम हो गई। नवंबर माह में कुल 1082 रजिस्ट्री कराई गईं, जिससे स्टांप ड्यूटी के तौर पर 3 करोड़ 14 लाख रुपये मिले। रजिस्ट्रेशन से 50 लाख 10 हजार 440 रुपये आए। यानी कुल तीन करोड़ 64 लाख 10 हजार 440 रुपये का राजस्व आया। नोटबंदी के पहले 22 दिन का असर देखा जाए तो प्रशासन को करीब 1 करोड़ 76 लाख से ज्यादा का घाटा हुआ। जानकारों की मानें तो नवंबर को शुरू के आठ दिनों में मिले राजस्व के कारण यह आंकड़ा कुछ हद तक ठीक रहा। इसके अलावा जिन लोगों ने एग्रिमेंट करा रखा था उन्हें मजबूरी में रजिस्ट्री करानी पड़ी। जनवरी माह से प्रॉपर्टी बाजार से मिलने वाला साढे़ करोड का राजस्व एक से डेढ़ करोड़ तक सिमट जाएगा।
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चार साल में 5 करोड़ का राजस्व घटा
जिले में प्रॉपर्टी बाजार में मंदी आने से पहले 2012 तक हर महीने करीब 11 से 12 करोड़ से ज्यादा का राजस्व आता था। इसके बाद हर साल हर महीने यह आंकड़ा कम होता गया। प्रॉपर्टी बाजार में मंदी के कारण 50 साल में पहली बार प्रशासन को सर्कल रेट घटाने को मजबूर होना पड़ा था।
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