फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एचएयू में कुलपतियों का 49वां सम्मेलन : पंतनगर विवि. के कुलपति प्रो. मनमोहन सिंह बोले-किसानों को स्मार्ट खेती करनी होगी, तभी फल-सब्जियां निर्यात कर पाएंगे

विज्ञापन
प्रो. मनमोहन। 
विज्ञापन
हिसार। अपर्याप्त प्रबंधन, खराब भंडारण, परिवहन सुविधाओं व कोल्ड स्टोरेज की कमी और प्रोसेसिंग न होने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। फल-सब्जियों का निर्यात कर सकें, इसके लिए किसानों को स्मार्ट खेती करनी होगी। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के कुलपति प्रो. मनमोहन सिंह ने यह बात कही। वे सोमवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में आयोजित कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के 49वें सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे।
विज्ञापन

प्रो. मनमोहन सिंह ने कहा कि 1950-60 के दशक में हम गेहूं व चावल का आयात करते थे। हरित क्रांति के बाद इनको निर्यात कर रहे हैं। इसी तरह देश को फलों-सब्जियों के क्षेत्र में भी निर्यातक बनाना है। आज हालत यह है कि देश में पैदा होने वाले टमाटर का 30-40 प्रतिशत हिस्सा मंडी तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है। इस नुकसान से बचने के लिए किसानों को प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, प्रबंधन पर फोकस करना होगा। दलहन, तिलहन में अधिक काम करना होगा। विदेशों की तुलना में देश के किसान को काफी काम करना होगा। दूसरे देशों में कृषि में बेहतर तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। हमें भी ड्रोन व एआई टेक्नोलॉजी का उपयोग करना होगा। देश में 74 कृषि विश्वविद्यालय व शोध संस्थान काम कर रहे हैं। इन सभी को मिलकर किसानों के लिए दूसरी हरित क्रांति के लिए काम करना होगा।

किसानों को सेंसर, ड्रोन, एआई का प्रयोग करना होगा
प्रो. मनमोहन सिंह ने कहा कि फसल में कौन सा रोग आने वाला है। फसल से कितनी पैदावार मिल सकती है। किसानों को हर एक आधुनिक तकनीक को प्रयोग में लाना होगा। स्मार्ट खेती के लिए सेंसर, एआई तथा ड्रोन सहित सभी टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा। इससे फल के आकार तक की जानकारी पहले ही ले सकेंगे।
विज्ञापन

एक भी तिनका बेकार न जाए
फसल के हर बायो प्रोडक्ट को प्रयोग में लाना होगा। अभी केवल 20 से 25 प्रतिशत का ही प्रयोग कर पाते हैं। फसल के एग्रीवेस्ट को भी उपयोग में लाना होगा। किसानों को उद्यमी बनाने से ही उनकी आय बढ़ेगी। इसी तरह
फसलों-फलों के केवल 27 प्रतिशत हिस्से को ही हम प्रोसेस कर पाते हैं। विकसित देशों में 90 प्रतिशत उत्पादों की प्रोसेसिंग होती है। अगर हम ऐसा कर पाए तो निर्यात भी कर पाएंगे। टमाटर का निर्यात नहीं कर पाएंगे लेकिन सॉस का निर्यात कर सकते हैं।
किसानों को खुद करनी होगी मार्केटिंग
किसानों को अपनी फसलों की मार्केटिंग खुद करनी होगी। इसके लिए सेल्फ हेल्प ग्रुप, फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन बनाने होंगे। किसान एक होकर फसलों का उत्पादन व प्रोसेसिंग करेंगे तो यह काफी सस्ता होगा। किसान ऐसा कर अपनी फसलाें को मंडी में पहुंचाएंगे तो काफी कम खर्च आएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें