पानी की समस्या से जूझ रहे बालसमंद क्षेत्र के 42 गांवों के ग्रामीण मंगलवार को बुड़ाक गांव में धरने से उठकर शहर की सड़कों पर उतर आए।
समस्या से आजिज आ चुके ग्रामीणों ने लघु सचिवालय के गेट पर डेरा डालकर नारेबाजी करते हुए प्रशासन व सरकार से महीने में दो सप्ताह तक पानी छोड़ने की मांग की।
किसानों के लघु सचिवालय पहुंचने की सूचना पर पहले से ही गेट पर भारी पुलिस बल तैनात था। पुलिस ने बेरिकेड्स लगाकर लघु सचिवालय के गेट को बंद कर दिया।
इसके चलते गेट की एक तरफ पुलिस और दूसरी तरफ ग्रामीण सुबह से शाम तक डटे रहे। बाद में प्रशासन को ग्रामीणों ने 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर फिर भी समाधान नहीं हुआ तो इसी तरह 18 नवंबर को दोबारा प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।
क्षेत्र के करीब 42 गांवों के ग्रामीणों व किसानों ने पहले क्रांतिमान पार्क में बैठक की, जिसकी अध्यक्षता दीपचंद शर्मा व जयलाल पूनियां ने संयुक्त रूप से की।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पानी की समस्या केवल एक गांव बुड़ाक की नहीं है बल्कि इस क्षेत्र के सभी गांवों में पानी के लिए जूझना पड़ रहा है।
सिंचाई तो दूर पीने के लिए भी नहीं पानी
जमीनी पानी खारा हो चुका है। सिंचाई की तो बात दूर, पीने के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं है। नहरी पानी पर सबकुछ निर्भर है और नहरी पानी आता नहीं है।
ऐसे में ग्रामीणों को भादरा से 800 से 1 हजार रुपये देकर पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। पिछले 28 दिनों से ग्रामीण गांव बुड़ाक में धरना लगाए बैठे रहे, लेकिन उनकी समस्या पर प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
वक्ताओं ने ग्रामीणों से अनुशासन और शांतिपूर्ण ढंग से अपने हक की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने क्रांतिमान पार्क से पैदल लघु सचिवालय की ओर कूच किया।
इतनी संख्या में ग्रामीणों के सड़क पर उतरने के कारण पूरा रास्ता वन-वे बन गया। बाद में भारी पुलिस बल तैनात होने के कारण ग्रामीण लघु सचिवालय के गेट पर ही जमकर बैठ गए। ग्रामीणों ने न किसी वाहन को अंदर जाने दिया और न ही बाहर आने दिया।
पानी लेकर ही उठेंगे
लघु सचिवालय के गेट पर डेरा डाले बैठे ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उन्हें उनके हक का पानी नहीं मिलेगा तब तक वे यहीं डटे रहेंगे।
किसान नेता सुरेश खौथ, वीरेंद्र पूनियां, मास्टर सतबीर और कुरड़ाराम नंबरदार आदि ने कहा कि कोई व्यक्ति आंदोलन की राह तभी चुनता है जब समस्या सिर के पार हो चुकी हो।
इन गांवों में कई सालों से पेयजल समस्या बनी हुई है। सरकार जब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं करेगी तब तक वे यहां से नहीं उठेंगे।
इन्होंने दिया सहयोग
किसानों के इस आंदोलन को सात बास खाप, बारह खाप, किसान संघर्ष समिति, हरियाणा किसान मंच, अखिल भारतीय किसान सभा, रोडवेज यूनियन, परमाणु विरोधी मोर्चा, हरियाणा गौशाला संघ और मदद सहित अन्य सामाजिक संस्थाओं ने समर्थन किया।
गांव बुड़ाक, बांडाहेड़ी, बालसमंद, डोभी, खारिया, सुंडावास, सरसाना, बासड़ा, गोरछी, रावलवास खुर्द, रावलवास कलां, तेलनवाली, कुतियांवाली, चौधरीवाली, मात्रश्याम, सलेमगढ़, मिंगनीखेड़ा, न्योली खुर्द, काजला, किरतान, सीसवाला, चौधरीवास, गावड़, धीरणवास, घुड़साल, बगला, शाहपुर, किरतान, टोकस, पातन, भेरियां और पनिहार आदि गांवों के ग्रामीणों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
अब करेंगे भूख हड़ताल
प्रदर्शनकारी लघु सचिवालय के गेट पर बैठे रहे, लेकिन कोई अधिकारी उनके पास नहीं पहुंचा। बाद में सायं चार बजे सांझा संघर्ष समिति के पदाधिकारी बातचीत के लिए एसडीएम कार्यालय पहुंचे।
वहां चली लंबे दौर की बातचीत में भी किसानों की मांगों को पूरा करने पर कोई सहमति नहीं बनी। इस पर समिति के पदाधिकारियों ने ऐलान किया कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाती उनका गांव बुड़ाक में आंदोलन जारी रहेगा।
इस दौरान किसान धरनास्थल पर भूख हड़ताल पर बैठकर प्रशासन व सरकार की किसान विरोधी नीतियों का विरोध जताएंगे। अगर किसानों की मांग फिर भी पूरी नहीं होती है तो 18 नवंबर को दोगुना ताकत के साथ एक बार फिर लघुसचिवालय पहुंचकर आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
सांझा संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष मास्टर भीम सिंह ने बताया कि अगर पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो विधानसभा चुनावों की तरह आगामी पंचायत चुनावों का भी बहिष्कार किया जाएगा।