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हिसार लोकसभा में मुकाबला तीन घरानों के वर्चस्व की लड़ाई बना

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हिसार। हिसार लोकसभा क्षेत्र का चुनावी मुकाबला रोचक बनने वाला है। इस चुनावी मैदान में तीन राजनीतिक घरानों का वर्चस्व दांव पर लग चुका है। तीनों घराने अपनी-अपनी साख बचाने के लिए चुनाव मैदान में न केवल दिन-रात एक करेंगे, बल्कि कोई कोर नहीं छोड़ेंगे। इसके अलावा अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों को भी इग्नोर नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे अपनी पारंपरिक वोटों के जरिए किसी भी अन्य प्रत्याशी का समीकरण बिगाड़ने का काम कर सकते हैं।
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भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के पुत्र बृजेंद्र सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है। बीरेंद्र सिंह ने अपनी राजनीतिक विरासत को बचाने के लिए अपने आईएएस बेटे से इस्तीफा दिलाकर राजनीतिक में उतारा है। इसके अलावा उन्हें न केवल मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा, बल्कि सक्रिय राजनीति से भी सन्यास की घोषणा करनी पड़ी। ऐसे में वे कतई नहीं चाहेंगे कि इतना कुछ करने के बावजूद उन्हें बेटे के राजनीतिक करियर की शुरुआत उनकी हार से देखनी पड़े। अत: वे कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।
दूसरी ओर इनेलो से अलग होकर अपनी पार्टी खड़ी करने वाले निवर्तमान सांसद दुष्यंत चौटाला की दावेदारी किसी से कम नहीं है। वे हिसार से निवर्तमान सांसद भी हैं। देवीलाल परिवार की चौथी पीढ़ी के सदस्य दुष्यंत चौटाला का इस सीट से जीत के लिए एडी से चोटी तक का जोर लगाने वाले हैं, क्योंकि इनेलो से अलग होने के बाद उनके लिए यह वर्चस्व की लड़ाई हो चुकी है। हालांकि पूर्व सांसद होने के चलते वे यह सोचकर बैठ नहीं सकते कि उन्हें वोट आसानी से मिल जाएंगी, लेकिन वे पिछले पांच साल के दौरान कराए गए कार्यों को लेकर जनता के बीच जाएंगे।
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इसी प्रकार तीसरे घराने भजनलाल की तीसरी पीढ़ी कुलदीप बिश्नोई ने अपने पुत्र भव्य बिश्नोई को मैदान में उतारा है। वे भव्य को टिकट दिलाने के लिए कांग्रेस के आलाकमान से अंत तक संघर्ष करते दिखाई दिए। यही कारण रहा कि कांग्रेस हिसार से अपने प्रत्याशी की घोषणा भी नामांकन के मात्र दो दिन रह जाने के बाद रविवार रात को ही कर पाई। ऐसे में कुलदीप बिश्नोई भी ये नहीं चाहेंगे कि उनके बेटे के राजनीतिक करियर की शुरुआत हार से हो, इसलिए वे भी जीत के लिए जी-तोड़ प्रयास करने वाले हैं।

अन्य प्रत्याशी बिगाड़ेंगे समीकरण
इनके अलावा इनेलो के सुरेश कोथ, बसपा-लोसुपा के सुरेंद्र सिंह सहित कई अन्य उम्मीदवारों को भी कमजोर नहीं आंका जा सकता। ये उम्मीदवार वोटों का समीकरण बिगाड़ने का मादा रखते हैं। इनका अपना वोट बैंक है और ये अपने उसी वोट बैंक के जरिए किसी भी उम्मीदवार का खेल बिगाड़ भी सकते हैं और बना भी सकते हैं।

हिसार लोकसभा क्षेत्र में वंशवाद की राजनीति
एक तरह से देखा जाए तो हिसार लोकसभा क्षेत्र वंशवाद की भेंट चढ़ा है। यहां से तीन घरानों ने अपने-अपने वारिसों को उम्मीदवार बनाने में शुरू से ही ऐडी-चोटी का जोर लगा रखा था। खासकर बीरेंद्र सिंह और कुलदीप बिश्नोई ने तो अपने-अपने सुपुत्रों को अपनी राजनीतिक विरासत सौंपने के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। बीरेंद्र सिंह ने भले ही स्वयं मंत्री पद से इस्तीफा और सक्रिय राजनीति से सन्यास की घोषणा कर दी, लेकिन उनकी पत्नी अभी भी उचाना से विधायक हैं और यह भी तय नहीं है कि यदि बृजेंद्र सिंह जीत से दूर रहते हैं तो बीरेंद्र सिंह दोबारा से राजनीति में नहीं कूदेंगे। इसी प्रकार कुलदीप ने अपने बेटे के लिए पूरा जोर भी लगाया और स्वयं भी राजनीति से दूर नहीं हुए। दुष्यंत चौटाला भी राजनीतिक घराने से ही ताल्लुक रखते हैं और स्वयं की पार्टी होने के चलते उनका ऐसा कोई बंधन नहीं है कि उनके पिता या अन्य कोई राजनीति में नहीं आएगा।
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