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वेंकैया नायडू बोले, कभी हिंदी भाषा के विरोध में आंदोलनो में था शामिल..

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
स्वर्ण जयंती समापन समारोह में उपराष्ट्रपति वेेंकैया नायडू ने 15 मिनट का भाषण दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि मैंने कभी बचपन से हिंदी ही नहीं पढ़ी। हिंदी अब भी अच्छी तरह नहीं आती। उन्होंने कहा कि मैं साउथ से हूं। हमारे यहां उस वक्त हिंदी विरोधी आंदोलन शुरू थे। मैं खुद भी इन आंदोलनों में शामिल हुआ। मगर बाद में पता चला कि हिंदी बिना इस देश में आगे बढ़ना संभव नहीं। इसके बाद मैंने टूटी फूटी हिंदी सीखी। उन्होंने जनसमूह से अपील करते हुए कहा कि नौजवान पीढ़ी और अपने बच्चों को हिंदी, साहित्य, हिंदुत्व और अपनी विरासत की जानकारी दें ताकि देश अपनी इस विरासत का संजोए रखें।
हरियाणा के लोग बड़े मेहनती
उपराष्ट्रपति ने अपने भाषण में एकता का संदेश दिया। उन्होंने कुछ पंक्तियां सुनाई। उन्होंने कहा अलग-अलग भाषा अलग-अलग वेश फिर भी हमारा एक देश है जैसी पंक्तियां भी सुनाई। भाषण में कहा कि हरियाणा के लोग बड़े मेहनती हैं। यहां के खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया है। वक्तव्य में उन्होंने चंदगी राम पहलवान व सहवाग का नाम भी लिया।
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किसान का बेटा हूं, जानता हूं खेती के संबंध में
वेेंकैया नायडू ने कहा कि मैं एक किसान के बेटे हूं। खेती के बारे में मैं जानता हूं। हरियाणा का कृषि के मामले में देश में दूसरा स्थान है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में हरियाणा व्यवसाय करने की सफलता सूची में पांचवें स्थान पर था। इस वर्ष प्रदेश का लक्ष्य दूसरे स्थान तक पहुंचने का है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि इस दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से हरियाणा अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल होगा।
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