पुलिस की डांट और डंडे खाते हुए तीन राज्यों से 36 लोग शनिवार को हिसार पहुंचे। इनमें हैदराबाद के 17, गुजरात के 10 और लखनऊ के नौ लोग शामिल हैं। सभी लोग घर जाने से पहले जिला नागरिक अस्पताल में जांच कराने के लिए पहुंचे। इनके मुताबिक यहां तक पहुंचने में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई जगह पुलिस की डांट तो कई जगह पुलिस के डंडे तक खाने पड़े।
बता दें कि लॉकडाउन के कारण उद्योग-धंधे बंद हो गए हैं। ऐसे में रोजगार के सिलसिले में अन्य राज्यों में गए लोग घरों को लौट रहे हैं। चूंकि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी से तरह बंद है।
दो दिन से लगातार कर रहे थे सफर
हैदराबाद से लौटे लोगों ने बताया कि वह वहां पर पैकर्स-मूवर्स का काम करते थे। चूंकि अब सब कुछ बंद है तो वह घर लौट आए। वह हैदराबाद से दो दिन पहले चले थे। उनके पास खुद का एक ट्रक है, जिसमें सवार होकर वे सभी हिसार पहुंचे हैं। ट्रक में ही उन्होंने खाने-पीने की व्यवस्था की हुई थी। रास्ते में पुलिस ने उन्हें डंडे भी मारे और डांट भी लगाई। लखनऊ से लौटे लोगों का कहना था कि हिसार आने के लिए उन्हें एक दिन लग गया। उनके पास तीन गाड़ियां हैं, जिससे जल्दी पहुंच गए। मगर रास्ते में पुलिस की काफी डांट सुनी।
ट्राइएज में 167 लोग पहुंचे जांच कराने
जिला अस्पताल में ट्राइएज में शनिवार दोपहर करीब तीन बजे तक राजस्थान, दिल्ली और प्रदेश के अन्य जिलों सहित 167 लोग जांच कराने पहुंचे। जहां पर तैनात नर्स स्टाफ ने मरीजों की हिस्ट्री जांच के बाद उन्हें ओपीडी स्लिप देकर फ्लू क्लीनिक में भेज दिया। यहां पर डॉक्टरों द्वारा जांच के दौरान किसी भी मरीज में कोरोना के लक्षण नहीं मिले तो उन्हें दवा देकर घर भेज दिया गया।
21 मार्च को न्यूूजीलैंड से लौटा था युवक
न्यूजीलैंड से लौटे युवक को जांच के बाद कोरोना संदिग्ध होने पर आइसोलेशन वार्ड में दाखिल कर लिया गया है और डॉक्टरों द्वारा युवक का सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार शहर की एक कॉलोनी का युवक 21 मार्च को न्यूूजीलैंड से अपने घर लौटा और यहां उसे खांसी, जुकाम की शिकायत हुई तो जांच के लिए जिला अस्पताल में पहुंचा था। उधर, जिला अस्पताल की ओर से शुक्रवार को भेजे गए पांचों सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आई है।
पॉजिटिव केस आने पर लगातार दस दिन देनी होगी ड्यूटी
पीएमओ डॉ. राजीव बतीश ने बताया कि आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल के वार्ड 11 व 13 को पूरी तरह से खाली करवा लिया है और उनमें 100 बेड लगाए हैं, ताकि कोई पॉजिटिव केस आता है तो उसे अलग से दाखिल किया जाएगा। इस आइसोलेशन वार्ड में मरीजों के लिए बेड के साथ सक्षम मशीनें व अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। अस्पताल के 100 कर्मचारियों के लिए रहने, खाने-पीने जैसी अन्य सुविधाओं के भी प्रबंध किए हैं। इस दौरान इन्हें घर नहीं भेजा जाएगा और ये कर्मचारी लगातार 10 दिन अपनी ड्यूटियां करेंगे और उसके बाद उन्हें 14 दिन के लिए अलग से धर्मशाला, रेस्टोरेंट आदि में ठहराए जाएंगे। उसके बाद घर भेजा जाएगा।
नागरिक अस्पताल में 33 हजार मास्क आए
पीएमओ ने बताया कि विभाग की तरफ से अस्पताल को 33 हजार मास्क मिले हैं। गाइडलाइन्स के अनुसार जो चिकित्सक कोरोना संदिग्ध मरीज के सैंपल लेग, केवल उन्हें ही 95 मास्क दिए जाएंगे। यदि जिला अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव केस आता है तो उस दौरान वार्ड में तैनात सभी चिकित्सक, नर्स स्टाफ व अन्य कर्मचारियों को मास्क, एप्रिन, ग्लव्स व अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा दी जाएंगी। वहीं, पीएमओ ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर, नर्स स्टाफ के अलावा कार्यरत अन्य कर्मचारियों के लिए आई कार्ड बनवाने के लिए भी फाइल जिला प्रशासन को भेज दी है।
टीबी मरीजों को दी जा रही एक माह की दवा
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कौशल वर्मा ने बताया कि टीबी मरीजों को आमतौर पर एक सप्ताह की दवा दी जाती है। लेकिन अब आशा वर्कर या स्वास्थ्य विभाग के जरिये उन्हें घर पर ही एक महीने की दवा पहुंचाई जा रही है। फिलहाल के लिए टीबी अस्पताल में भी 30 बेड की व्यवस्था करवा दी गई है और वार्ड में दाखिल मरीजों को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है।
अस्पताल में जलभराव से मरीज परेशान
इधर, अस्पताल परिसर में बारिश के पानी की सही तरह से निकासी न होने के कारण शनिवार दोपहर को फ्लू क्लीनिक के बाहर जलभराव हो रखा था। उस दौरान जांच के लिए मरीजों को वहां पर खड़ा होने के लिए पूरी जगह भी नहीं थी। इससे सभी मरीजों को लाइन में खड़ा होने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।