नारनौंद (हिसार)। आज विश्व धरोहर दिवस है। हमारे जिले में हड़प्पा कालीन सभ्यता की सबसे बड़ी साइट है राखी गढ़ी। देश-दुनिया प्राचीन सभ्यता से रूबरू हो सके, इसके लिए राखी गढ़ी को विश्व स्तर पर विकसित किया जा रहा है।
विश्व धरोहरों में शामिल राखी गढ़ी साइट पर निर्माणाधीन म्यूजियम के लिए पीडब्ल्यूडी ने सरकार से 35 करोड़ रुपये का और बजट मांगा है। अधिकारियों की मानें तो 23 करोड़ म्यूजियम के लाइट सिस्टम व 12 करोड़ रुपये फिनिशिंग पर खर्च किए जाएंगे। फिलहाल साइट पर 25 करोड़ की लागत से आधुनिक म्यूजियम, कैफे हाउस व रेस्ट हाउस का निर्माण किया जा रहा है, जिसका 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
पीडब्ल्यूडी ने पुरातत्व विभाग को लिखा पत्र
पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) के एसडीओ रण सिंह ने बताया कि हमने म्यूजियम में होने वाली फिनिशिंग व डिजाइनिंग के लिए पुरातत्व विभाग को एक पत्र लिखा है, ताकि विभाग के साथ बैठक कर आगे होने वाले कार्यों के लिए निर्णय लिया जा सके और म्यूजियम के काम को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सके।
निर्माण की समय सीमा हुई खत्म
वैसे तो म्यूजियम के निर्माण की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। फिलहाल म्यूजियम, कैफे हाउस, हॉस्टल व रेस्ट हाउस में से हॉस्टल, रेस्ट हाउस व कैफे हाउस का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। म्यूजियम की जमीन पर एक कोर्ट होने के कारण म्यूजियम का काम देरी से शुरू हो पाया। अब म्यूजियम का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। म्यूजियम का काम पूरा होने के बाद खुदाई के दौरान निकला हुआ सामान रखा जाएगा। चूंकि प्रोजेक्ट के लिए और राशि की मंजूरी के लिए एस्टीमेट भेजे गए हैं। संभावना है कि उनकी मंजूरी के साथ ही समय सीमा भी बढ़ जाएगी।
साइट के विकसित होने से राजस्व में होगी बढ़ोतरी
राखी गढ़ी में अंतरराष्ट्रीय स्तर के बनने वाले इस म्यूजियम से प्रदेश सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही गांव व आसपास के क्षेत्र को भी उसी स्तर पर विकसित किया जाएगा। इस म्यूजियम में राखी गढ़ी खुदाई के दौरान मिले मानव कंकाल, पुराने समय के आभूषण, सोने के मनके, मिट्टी की चूड़ियां, मनकों की माला, फियांस की चूड़ियां, माथे की बिंदी, सिंदूर दानी, अंगूठी, कानों की बालियां मिट्टी के बर्तन, पत्थर के मनके, हाथी के दांत, उस समय के औजार सहित अनेक रोचक चीजें म्यूजियम में रखी जाएंगी। इन्हें देखने के लिए विदेशों से पर्यटक आएंगे। (संवाद)