फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मिर्चपुर के दोषियों में से शनिवार को दिल्ली हाई कोर्ट में नहीं हुआ कोई पेश

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौंद (हिसार)। मिर्चपुर मामले के सभी दोषियों को दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से शनिवार को अदालत में पेश होने का समय था। शनिवार को कोई भी दोषी अदालत में पेश नहीं हुआ। अदालत ने पुलिस को पांच सितंबर तक सभी को पेश करने के आदेश दिए हैं। मिर्चपुर गांव में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा। गांव की गलियां सुनसान नजर आईं। दलित बस्ती के कुछ परिवारों की महिलाएं व बच्चे अपनी रिश्तेदारियों में चले गए हैं। नारनौंद पुलिस ने दो रिजर्व पुलिस बल की टुकड़ी गांव में तैनात की हैं।
दलित बस्ती के घरों में आग लगाने के मामले में 24 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने 33 लोगों को सजा सुनाई थी। उसमें 12 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। एक सितंबर तक सभी को कोर्ट में सभी अभियुक्तों को सरेंडर करना था। शनिवार को किसी भी अभियुक्त ने अदालत में सरेंडर नहीं किया। गांव में पूरी तरह से लोग मायूस हैं। फैसले को 10 दिन का समय गुजरने के बाद भी गांव के हालात सामान्य नहीं हुए हैं। अब भी गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कोर्ट का फैसला गांव में तनाव पैदा करने वाला है। पुलिस की दो रिजर्व टुकड़ियां लगा दी गई हैं। अब इन सभी को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट की तरफ से आदेश दिए गए हैं कि सभी को जल्द से जल्द पेश किया जाए। अब सभी अभियुक्तों को गिरफ्तार करना पुलिस के लिए सिरदर्द बनता नजर आ रहा है। गांव में कोई भी आरोपी अब नजर नहीं आ रहा। ऐसे में पुलिस के लिए इन सभी को गिरफ्तार करना इतना आसान नहीं होगा। पुलिस को भी पहले से ही अंदेशा था कि इनको गिरफ्तार करना आसान नहीं है। कोर्ट ने नारनौंद थाना प्रभारी को पांच सितंबर को अदालत में पेश होकर आदेश की पालना रिपोर्ट भी पेश करने के आदेश दिए गए हैं कि इस मामले में पुलिस ने अभी तक क्या किया है।
विज्ञापन

समन्वय समिति के अध्यक्ष मास्टर चंद्र प्रकाश ने बताया कि जिन लोगों को आज अदालत में पेश होना था, उनको कोर्ट की तरफ से कोई नोटिस या फैसले की कॉपी नहीं मिली है। हम कोर्ट का सम्मान करते हैं। दलित महिलाओं व बच्चों का गांव से बाहर जाने की बात हमारे संज्ञान में नहीं है। गांव में अब भी पूर्ण रूप से भाईचारा कायम है। आरोपियों के अदालत में सरेंडर न करने की वजह से बस्ती के कुछ लोगों ने अपने बीवी व बच्चों को अपनी रिश्तेदारियों में या दूसरी जगह भेज दिया है। दलित लोगों ने कहा कि ढंढूर में जल्द हमारा पुनर्वास वहां पर किया जाए। अब हम किसी भी कीमत पर गांव में नहीं रहना चाहते।
विज्ञापन


माननीय दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से जो भी आदेश होंगे, उनकी पालना की जाएगी। गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। गांव में अभी तक बिल्कुल शांति है। किसी भी कीमत पर गांव में माहौल नही बिगड़ने दिया जाएगा।
-साधु राम, थाना प्रभारी नारनौंद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें