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बोर्ड के अधीन होगा बनभौरी स्थित माता भ्रामरी का मंदिर

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
एतिहासिक शक्तिपीठ माता भ्रामरी देवी मंदिर बनभौरी को अब बोर्ड के जरिये चलाया जाएगा। माता मनसा देवी मंदिर की तरह से यहां बोर्ड गठित होगा। प्रदेश सरकार ने बुधवार को कैबिनेट की मीटिंग में इसे मंजूर किया है।
प्रदेश सरकार ने बनभौरी मंदिर से जुड़ी एक विस्तृत रिपोर्ट पिछले साल प्रशासन से ली थी। इसके आधार पर इस मंदिर को पंचकूला के मनसा देवी मंदिर की तर्ज पर अपने अधीन करने के लिए फैसला लिया है। बनभौरी धाम को अपने नियंत्रण करने के बाद मंदिर परिसर और उसके आसपास के रखरखाव का सारा जिम्मा सरकार उठाएगी।
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15 करोड़ तक आता है चढ़ावा
माता बनभौरी धाम में साल में दो बड़े मेले और कुछ छोटे मेले लगते हैं। मेलों के दौरान मंदिर में हरियाणा ही नहीं देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु माता भ्रामरी देवी के दर्शनों के लिए आते हैं। वर्षभर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। इस दौरान मंदिर में आने वाले माता के भक्त करोड़ों का चढ़ावा भी चढ़ाते हैं। एक अनुमान के अनुसार हर वर्ष मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा 15 से 16 करोड़ रुपये का चढ़ाव आता है।
2012 में भी किया गया था प्रयास
ऐतिहासिक माता बनभौरी धाम को पूर्व की हुड्डा सरकार में वर्ष 2012 में भी मंदिर को सरकार ने अपने नियंत्रण में करने की कोशिश की थी। विरोध बढ़ने के कारण सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए थे।
मनसा देवी मंदिर का पैटर्न अपनाने पर विचार
सरकार पंचकूला के मनसा देवी मंदिर के पैटर्न पर ही सरकार माता बनभौरी धाम को अपने नियंत्रण में लेने पर विचार कर रही है। हरियाणा सरकार ने मनसा देवी को अपने नियंत्रण में लिया हुआ है। श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड पंचकूला ट्रस्ट की स्थापना की हुई है, जो मंदिर की देखरेख का कार्य करती है।
एक ही परिवार का आधिपत्य
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार यह मंदिर गांव की सार्वजनिक जमीन पर बना हुआ है। इस पर एक ही परिवार का आधिपत्य है। पूरा चढ़ावा एक ही परिवार के पास रहता है। प्रदेश सरकार ने पिछले साल इस मंदिर की जमीन का रिकॉर्ड भी मांगा था।
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अमर उजाला ने पिछले साल छापी थी खबर
अमर उजाला ने इस बारे में 25 नवंबर 2016 के अंक में सबसे पहले खबर प्रकाशित की थी। प्रशासन की एक साल पहले की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए सरकार की ओर से बनभौरी मंदिर के बारे में फैसला लिया गया है।
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