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बंदर पकड़वाने के लिए संस्था ने करवाया मथुरा की टीम को सर्वे

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
सेक्टरों में सड़कों की समस्याओं, बंदरों, पानी के बिलों के विरोध में रविवार को साढ़े 12 बजे सेक्टर-13 के लोग भी एकत्रित होंगे। सामाजिक कार्यकर्ता अमित ग्रोवर ने बताया कि बंदरों को पकड़ने वाली मथुुरा की टीम को सेक्टर और इसके आसपास के एरिया का सर्वे करवाया गया है। बंदर पकड़ने वाली टीम के साथ बातचीत चल रही है। अगले सप्ताह से बंदर पकड़ने का अभियान शुरू हो जाएगा।
निगम हर बार करवाता है खानापूर्ति
नगर निगम हर बार बंदर पकड़वाने को लेकर खानापूर्ति करता है। शहर में हजारों की संख्या में बंदर है, लेकिन हर बार 200 या इससे कम बंदर पकड़वाने के बाद एजेंसी को और बंदर पकड़ने से रोक देता है। जब एजेंसी पैसे मांगती है तो निगम के दो ब्रांचों के अधिकारी जिनमें एकाउंट, ऑडिट ऑब्जेक्शन लगा देता है। इन दोनों ब्रांचों के अधिकारियों की लगाम निगम कमिश्नर के पास नहीं है। हालांकि ये डेपुटेशन पर आए कर्मचारी व अधिकारी हैं। कमिश्नर चाहे तो काम न करने वाले इन कर्मचारियों को निगम से रिलीव कर वापस भेज सकता है मगर पता नहीं क्यों अधिकारी इन पर कार्रवाई नहीं कर पा रहे और जनता परेशान होती रहती है।
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500 रुपये में पकड़ेगी टीम बंदर
नगर निगम ने हाल ही में दो बार बंदर पकड़ने को लेकर टेंडर लगाया था। निगम की पेमेंट न करने की फितरत अथवा मामला उलझाने के चक्कर में कोई एजेंसी टेंडर लेने के लिए तैयार नहीं। सद्भावना संस्था ने खुद अपने स्तर पर वन्य प्राणी विभाग ने बंदर पकड़ने के लिए एनओसी ली है। खुद ही बंदर पकड़ने वाली दो से तीन टीमों से संपर्क किया है। अब एक टीम मथुरा से हिसार पहुंची है। वह टीम जिस एरिया में बंदर पकड़ेगी उसका सर्वे कर रही है। टीम को एक बंदर पकड़ने के 500 रुपये दिए जाएंगे।
यहां होंगे विरोध को लेकर लोग एकत्रित
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-13 के मकान नंबर 560 के सामने वाले चौक पर एकत्रित होंगे। उन्होंने सेक्टर 16-17 वासियों से भी अपील की है कि वे भी साढ़े 12 बजे एकत्रित होकर विरोध में हिस्सा लें।
रोजाना तीन लोगों को काट रहे बंदर
पिछले महीने बंदरों ने मिलगेट एरिया में एक साथ तीन बच्चों को बुरी तरह से काट खाया था। छोटे बच्चे बंदरों के आतंक के कारण छतों पर भी नहीं जा पाते। बंदरों को भगाने के लिए प्रयास कर रहे दादी पोते की करीब नौ महीने पहले करंट से मौत भी हो चुकी है। बंदरों के काटने के हर रोज दो से तीन मामले आ रहे हैं।
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बंदर खुले, लोग पिंजरे में कैद
बंदरों के खुले होने के कारण लोग पिंजरे में कैद होने को मजबूर हैं। पहले लोग अपने घरों में खुले आंगन रखते थे। बंदरों के आतंक के कारण अब लोग अपने पूरे घर को लोहे के जाल से कवर करा रहे हैं। जिसके चलते लोग खुद पिंजरे में कैद हो गए हैं।
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