अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
हाउस टैक्स ब्रांच में लगातार चल रही घालमेल की सूचनाओं के बाद पुलिस का खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया है। खुफिया तंत्र ने टैक्स ब्रांच से संबंधित निगम अधिकारियों से रिकॉर्ड मांगा है। इस मामले पर नगर निगम के कमिश्नर से खुफिया तंत्र ने मुलाकात की। उन्होंने कमिश्नर से कहा कि ये क्या चल रहा है। सूचना मिल रही है कि टैक्स ब्रांच में बड़ा गड़बड़ मामला है। उन्होंने कहा कि जांच के लिए हमें रिकॉर्ड उपलब्ध करवाया जाए। इस मामले के बाद नगर निगम कार्यालय में हड़कंप मच गया है।
बड़े घालमेल की आशंका
हाउस टैक्स में बड़े घालमेल की आशंका है। आम लोगों का टैक्स का पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है, इसकी जांच जरूरी है। एरियर भरने के बाद भी आखिर सभी प्लॉट होल्डर्स के प्रॉपर्टी एकाउंट पर इतना बकाया क्यों दिखाया जा रहा है। पूरा मामला निगम स्टाफ ने रचाया हुआ है मगर परेशानी आम जनता भुगत रही है।
सर्वर से हटवाया गया था डीसी की चिट्ठी पर रिकॉर्ड
हाउस की रिव्यू मीटिंग में हाउस टैक्स को लेकर मुद्दा उठा था। कंपनी के मैनेजर ने भरी सभा में कहा था कि 51 जी-8 (रसीद बुक) यानी 51 सौ रसीदों का रिकॉर्ड उन्होंने सर्वर से हटाया है। यह रिकॉर्ड उन्होंने तब हटाया था, जब उन्हें डीसी के नाम की चिट्ठी मिली थी। कंपनी ने इस लेटर को आधार मानते हुए इतनी जी-8 का रिकॉर्ड जीरो कर दिया था।
कर्मचारी ने खुद ही जारी कर ली थी जी-8
इस मामले के बाद इसी ब्रांच में एक और मामला सामने आया था। एक ही कर्मचारी ने बिना जी-8 ईश्यू करने वाले इंचार्ज की अनुमति के बगैर ही खुद ही अपने नाम 2 जी-8 जारी कर ली थी। यह मामला तब पकड़ा गया जब न तो कर्मचारी ने रसीद बुक जमा करवाई और न ही पैसा। जी-8 कब जारी हुई और उसने पैसा क्यों नहीं जमा करवाया गया, इसको लेकर निगम के अधिकारी खानापूर्ति कर रहे हैं। सरकारी धन और इतने दिनों तक कैसे यूज कर रहा था? उसने आखिर क्यों रसीद बुक और पैसा जमा नहीं करवाया। इसके पीछे उसकी मंशा क्या थी, कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
हाउस टैक्स मामले में पहले हो चुका एक क्लर्क बर्खास्त
हाउस टैक्स में गड़बड़ी का मामला कोई नया नहीं है। पहले भी कई बार इस तरह का मामला सामने आता रहा है। करीब पांच साल पहले निगम का एक क्लर्क अनिल हाउस टैक्स में गड़बड़ करने के आरोप में बर्खास्त हो चुका है। उस पर आरोप था कि उसने जी-8 से रसीदें काटी, लेकिन कैश जमा नहीं करवाया। उस पर लाखों रुपये के घालमेल का आरोप था।
पुलिस का खुफिया तंत्र पहुंचा निगम कमिश्नर के पास
हाउस टैक्स जांच के लिए मांगा रिकॉर्ड
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