हिसार। छत्तीसगढ़ के जिला बीजापुर के जंगली क्षेत्र के गांव भदयपारा के जीतू ऐमला के संघर्ष की कहानी बड़ी ही मार्मिक है। राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी जीतू ऐमला के पिता की 10 साल पहले नक्सलियों ने घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी थी। मगर इस दहशत के माहौल में भी उसकी मां लकमी ऐमला ने हिम्मत नहीं हारी। मां ने मजदूरी करके जीतू को पढ़ाया और लगातार मेहनत करवाकर उसे मात्र 13 साल की उम्र में राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बनाया। जीतू ऐमला हिसार में आयोजित 64वीं राष्ट्रीय स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता में हॉकी खेलने हिसार आया हुआ है।
जीतू ने एक ऐसे गांव से उठकर हॉकी में मुकाम बनाया है, जहां शाम 4 बजे बाद ग्रामीणों को घरों से बाहर निकलने की मनाही है। इस गांव के आसपास नक्सलियों की दहशत है। अंधेरा होते ही यहां नक्सलियों का राज हो जाता है। अब तक नक्सली जीतू ऐमला के गांव के करीब 300 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार चुके हैं। छत्तीसगढ़ की टीम के दो खिलाड़ी विक्की और शंकर भगत भी नक्सलवादी प्रभावित क्षेत्र से हैं।
पिता थे गांव के मुखिया, इसलिए कर दी थी हत्या
हॉकी खिलाड़ी जीतू ऐमला ने बताया कि उसके पिता सोनू ऐमला उनके गांव भदयपारा के मुखिया थे। वह गांव में जन जागरूकता के काम करवाते थे। इससे नक्सलवादियों ने घर में घुसकर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। उस समय जीतू मात्र तीन साल का था। पिता की हत्या के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी मां लकमी ने संभाली। जीतू ऐमला के तीन भाई और एक बहन हैै। बड़ा भाई रोशन बीए की पढ़ाई कर रहा है, सबसे छोटा दिनेश प्राइमरी स्कूल में पढ़ता है। मंझला भाई रमेश घर की रसोई व अन्य खर्चा चलाने लिए अपनी मां के साथ मिलकर खेतों में मजदूरी करता है।
राज्य स्तर पर गोल्ड जीत चुका है जीतू ऐमला
छत्तीसगढ़ हॉकी टीम के कोच दलीप रावत, सुनील श्रीवास्तव व अलताफ अहमद ने बताया कि जीतू ऐमला अंडर 14 आयु वर्ग हॉकी टीम में राइट-इन फील्ड में खेलता है। जीतू ऐमला पहली बार स्कूली नेशनल प्रतियोगिता खेल रहा है। पिछले साल जीतू राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत चुका है। छत्तीसगढ़ सरकार की योजना के तहत जीतू ऐमला बीजापुर जिले के आदिवासी छात्रावास में रह रहा है। यहां हॉकी नर्सरी में अभ्यास करता है और आठवीं कक्षा का छात्र है।
देश की टीम में खेलने का लक्ष्य
जीतू ऐमला कहते हैं कि वह उस दिन का इंतजार कर रहा है, जिस दिन उसे भारत की राष्ट्रीय हॉकी टीम में खेलने का मौका मिलेगा। वह दिन उसकी जिंदगी का सबसे स्वर्णिम दिन होगा। उसे लक्ष्य को लेकर वह लगातार मेहनत कर रहा है।