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नागरिक अस्पताल के निकू वार्ड से दो बच्चों को निकाला

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हिसार। नागरिक अस्पताल के निकू वार्ड से दो बच्चों को यह कहकर बाहर निकाल दिया गया कि वार्ड में पर्याप्त जगह नहीं है। दोनों के माता-पिता बच्चों को लेकर निकू वार्ड के बाहर गलियारे में ही दिन-रात काटने को मजबूर रहे। इस बीच सोमवार को बच्ची के पिता परमजीत ने स्वास्थ्य मंत्री को ट्वीट किया। आखिरकार छह घंटे बाद सोमवार शाम को बच्ची की माता को बेड उपलब्ध करा दिया गया।
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भगत सिंह कॉलोनी निवासी परमजीत ने बताया कि उसकी पत्नी आरती ने नौ अप्रैल को बच्ची को जन्म दिया। 26 अप्रैल को उनकी बच्ची को बुखार हो गया तो वे उसे रात 10 बजे नागरिक अस्पताल लेकर आए। उन्हें यहां रखा गया, लेकिन तब से ही बेड नहीं मिला। बच्ची को हर दो घंटे बाद चेक किया जाता, लेकिन आरती को महिला वार्ड में बेड नहीं मिला और उन्हें निकू वार्ड के बाहर गलियारे में ही रात और दिन बिताने पड़ते। उनके साथ एक और अभिभावक जमावड़ी निवासी सुरेंद्र भी थे, जिनकी बच्ची को पीलिया था और वे भी पिछले पांच दिन से अस्पताल में मौजूद थे। उन्हें भी बेड नहीं मिलने के कारण गलियारे में ही दिन-रात काटने पड़ रहे थे। सोमवार सुबह करीब नौ बजे दोनों परिवारों को अस्पताल के स्टाफ ने गलियारे से निकाल दिया। इसके बाद दोनों परिवार अपने बच्चों को लेकर निकू वार्ड के बाहर ही फर्श पर बैठ गए।
परमजीत ने यह लिखा ट्वीट में
गलियारे से निकाले जाने के बाद परमजीत ने सुबह करीब 10 बजे स्वास्थ्य मंत्री को ट्वीट कर दिया। ट्वीट में उसने लिखा कि हिसार सिविल अस्पताल के वार्ड में पर्याप्त बेड नहीं होने के कारण एक बेड पर 2-2 महिलाओं को रखा जाता है। वार्ड की साफ-सफाई भी ठीक नहीं है। हालांकि परमजीत ने नर्सरी की व्यवस्था दुरुस्त होने की बात भी ट्वीट में लिखी। इस ट्वीट का जवाब तो नहीं मिला, लेकिन शाम चार बजे परमजीत की पत्नी और बच्ची को अस्पताल प्रशासन द्वारा बेड मुहैया करवा दिया गया।
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महिला वार्ड में हैं केवल चार बेड
निकू वार्ड के साथ महिला वार्ड में केवल चार ही बेड हैं, जबकि जिस नाक-कान, गले के वार्ड में परमजीत की पत्नी आरती को रखा गया है, उसमें पांच बेड हैं। इन बेडों पर महिलाओं की संख्या बढ़ने पर एक बेड पर 2-2 मरीजों को जगह दे दी जाती है। जिन महिलाओं के बच्चे नर्सरी में दाखिल हैं और उनकी माताएं ठीक हैं, उन्हें एक बेड पर दो को एडजेस्ट किया जाता है।
पुरुष वार्ड में मिला बेड, डॉक्टर ने निकाला
परमजीत के अनुसार शनिवार को उनकी पत्नी पुरुष वार्ड में खाली बेड पर चली गई। देर रात दौरे पर आईं एक डॉक्टर ने उन्हें यह कहकर वहां से निकाल दिया कि यह पुरुष वार्ड है और छोटे बच्चे को इन्फेक्शन का खतरा है। इसके बाद परमजीत की पत्नी अपने बच्चे को लेकर वापस गलियारे में लगे बेंच पर आ गई थी।
एक बच्ची को छुट्टी, दूसरे को शाम चार बजे मिला बेड
जमावड़ी गांव निवासी सुरेंद्र की बच्ची को सोमवार दोपहर करीब एक बजे छुट्टी दे दी गई, जबकि परमजीत का परिवार बाहर ही बैठा था। उसकी पत्नी को देर शाम चार बजे बेड नसीब हुआ। यह बेड भी उसे महिला वार्ड में नहीं मिला, बल्कि नाक-कान, गले के मरीजों के वार्ड में बेड उपलब्ध कराया गया।

वार्ड में पहले कोई बेड खाली नहीं था। जैसे ही किसी मरीज को छुट्टी दी गई, मरीज को बेड उपलब्ध करवा दिया गया। मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसका विशेष ख्याल रखा जाता है।
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- डॉ. संजय दहिया, सीएमओ, हिसार।
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