हिसार। हरियाणा पशुधन फार्म में एक के बाद एक फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आ रही हैैं। जमीन जोतने व सिक्योरिटी टेंडर में फर्जीवाड़े की शिकायत के बाद इन पर कार्रवाई भी हो चुकी है। इन शिकायतों के बाद हुई जांच में तीनों सिक्योरिटी कंपनियों का ठेका रद्द कर दिया गया है और उनके बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। वहीं दूसरे जमीन जोतने वाले टेंडर में दो पर केस दर्ज होने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी हुई है कि इन फर्जी कागजात का फायदा किसको मिला है। इन शिकायतों के बाद दो और टेंडर में भी फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आई है जिन पर अभी जांच की जा रही है।
टेेंडर नं 1:
खेत से चारा काटकर लाने का टेंडर
फार्म की तरफ से खेत से चारा काटकर फार्म में लाने के लिए मार्च में टेंडर मांगे गए। इसके लिए फार्म कुल छह टेंडर आवेदन मिले। 34 रुपये में प्रति क्विंटल की दर से अपने ट्रैक्टर का प्रयोग करते हुए खेत से चारा काटने का टेंडर करनाल के विरेंद्र व राजबीर को मिला। करीब तीन महीने बाद की कम चार आने की शिकायत पर इनका टेंडर रद्द करके सरकारी ट्रैक्टर प्रयोग के साथ खेत जोतने वाले ठेकेदार कृष्ण को ही 34 रुपये की दर से यह काम भी दे दिया गया। इस मामले में संजीव कुमार द्वारा शिकायत की गई है। अपनी शिकायत में संजीव ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने मिलीभगत करके 34 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर सरकारी ट्रैक्टर के साथ कृष्ण को टेंडर दे दिया गया है जिससे फार्म को लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ है। इस मामले में जांच की जा रही है।
टेंडर नं 2:
कटा चारा खोर तक पहुंचाने का टेंडर
मार्च में ही कटा चारा खोर तक पहुंचाने का टेेंडर 26 रुपये में कृष्ण कुमार व गुरपाल को मिला। इस मामले में टेंडर लगाने वाले करनाल के विरेंद्र व राजबीर ने इस बारे में कागजात निकलवाए तो मामला सामने आया कि दोनों टेंडर को लेने के लिए करनाल के बलड़ी गांव निवासी ईश्वर सिंह के नाम से फर्जी टेंडर भरा गया था। इस मामले में ईश्वर सिंह ने सी एम विंडो पर शिकायत दर्ज करवाकर बताया कि उसने यहां पर कोई टेंडर आवेदन नहीं किया है। इस मामले में उनको कागजात का फर्जी प्रयोग किया गया है। उनके नाम से फर्जी आवेदन करके ठेकेदार को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है।
इससे पहले भी आ चुके हैं दो मामले सामने
फार्म में इससे पहले भी दो फर्जीवाड़े के मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से एक जमीन जोतने का टेंडर व दूसरा फार्म की रखवाली का टेंडर है। रखवाली वाले टेंडर में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद इनका टेंडर रद्द किया जा चुका है। इस मामले में तीनों कंपनियों का सिक्योरिटी का करीब 22 लाख रुपये का तीन माह का बिल फार्म द्वारा रोक लिया गया है।
पूर्व डिप्टी डायरेक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए निदेशक को भेजा पत्र
राज्य पशु प्रजनन परियोजना क्षेत्र 3 के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुरेंद्र गहलावत के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए चीफ सुपरिंटेंडेंट एसके बागौरिया ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के महानिदेशक को पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि कृृष्ण कुुमार की तरफ से 3 अक्तूबर को एक सीएम विंडो प्राप्त हुई थी जिसमें डॉ. सुरेंद्र गहलावत पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। इस शिकायत के आधार पर की गई जांच में सुरेंद्र गहलावत पर ठेकेदार के साथ मिलीभगत करके 5 लाख 83 हजार का गबन कर लिया। इसके अलावा उन्होंने तीन किलोमीटर की खाई खुदवाकर उसकी मिट्टी बेच दी। डॉ. गहलावत ने अपने कार्यकाल में शेड का गलत तरीके से निर्माण करवाकर लाखों रुपये की गड़बड़ी की है।
पहले वाला ठेकेदार चारा पूरा नहीं कर पा रहा था। इसी वजह से उसका टेंडर रद्द किया गया था। चारा काटने के मामले में ऊपर से अनुमति ली गई थी उसी के बाद नए ठेकेदार को टेंडर दिया गया है। अगर ईश्वर के कागजात का किसी ने गलत प्रयोग किया है तो वह इस बात की पुलिस में शिकायत दे। डॉ. गहलावत के कार्यकाल में हुए कई फर्जीवाड़े सामने आए थे जिसके आधार पर कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। सिक्योरिटी कंपनियों का टेंडर रद्द कर दिया गया है व उनके बिल रोक दिए गए हैैं।
श्री कृष्ण बागौरिया, चीफ सुपरिंटेंडेंट, हरियाणा पशुधन फार्म
मेरे खिलाफ इन आरोपों की दो बार पहले भी जांच हो चुकी है। इन मामलों में मैने कोई गड़बड़ी नहीं की है। मैने अपने कार्यकाल में शिकायतकर्ता कृष्ण की फर्जी सिक्योरिटी कंपनियों के बिलों पर रोक लगाई थी व टेंडर फर्जीवाड़े को उजागर किया था। मेरी निष्पक्षता की मुहिम के कारण फर्जीवाड़ा करने वालों के निजी हित प्रभावित हुए हैं इससे यह सब फर्जी शिकायत कर रहे हैं।
- डॉ. सुरेेंद्र गहलावत, पूर्व डिप्टी डायरेक्टर, पशुधन फार्म