अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
चार जनवरी से देश के 4041 शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण होना है। स्वच्छता रैंकिंग में पिछले साल 291 अंक लेने वाले हमारे शहर में इस बार भी अच्छी रैंकिंग की दरकार है। जो हालात पिछले साल थे, वैसे ही हालात आज भी हैं। सर्वे शुरू होने में आठ दिन बाकी है।
शहर के हालात ऐसे हैं कि सार्वजनिक टॉयलेट में अब भी लोग बोतल लेकर जा रहे हैं। ऐसे ही हालात शहर का दिल कही जाने वाली राजगुरु मार्केट के हैं। मेन मार्केट के टॉयलेट ऐसी अवस्था में हैं कि वहा अंदर घुसना कठिन होता है। टॉयलेट के बाहर अतिक्रमण इतना कि टॉयलेट का दरवाजा तक नहीं दिखता। खरीददारी के लिए आने वाले लोग बाहर लगे अतिक्रमण और स्टॉल को देखकर पीछे हट जाते हैं।
टॉयलेट में न पानी, न सफाई : ख्यालिया
पूर्व पार्षद प्रतिनिधि हरज्ञान सिंह ख्यालिया का कहना है कि आजाद नगर में बने टॉयलेट को छह से सात महीने हुए हैं, लेकिन टॉयलेट में न तो पानी है न ही सफाई की जा रही है। आसपास झुग्गियों में रहने वाले लोग पानी की बोतल साथ लेकर टॉयलेट प्रयोग करने को मजबूर हैं। स्वच्छता रैंकिंग ऐसे नहीं आएगी, अगर हालात ये रहेंगे तो पिछले साल की रैंकिंग से नीचे आ जाएंगे।
टूंटियां टूटी हुई, सफाई वाला देखा ही नहीं : धर्मपाल
आजाद नगर निवासी धर्मपाल का कहना है कि टॉयलेट की टूंटियां टूटी हुई हैं। सफाई वाले को कभी यहां देखा ही नहीं। ऐसे में टॉयलेट बिना मेंटेन कैसे चलेगा। नगर निगम के अधिकारी केवल टॉयलेट बना तो देते हैं, लेकिन इसकी मेंटेनेंस, साफ-सफाई का कोई ध्यान नहीं देते। केवल खानापूर्ति कर अधिकारी पल्ला झाड़ लेते हैं।
पिछले साल की बजाय एक प्रतिशत भी सुधार नहीं : राजेेश जैन
राजगुरु मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान राजेेश जैन का कहना है कि मार्केट में न तो सफाई व्यवस्था ठीक है, न ही पार्किंग और टॉयलेट। मेन मार्केट होते हुए भी यहां आम लोगों के लिए बनाए गए टॉयलेट में निकासी ठीक नहीं है। पानी, लाइट की व्यवस्था नहीं। यूरिनल पोर्ट रुके हुए हैं। टॉयलेट के बाहर अतिक्रमण है। मार्केट में टॉयलेट सफाई से लेकर पार्किंग व्यवस्था खराब है। पिछले साल की तुलना करें तो सफाई में इस वर्ष एक प्रतिशत भी सुधार नहीं। ऐसे में अच्छी रैंकिंग की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं।