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उपभोक्ता फोरम के छह बड़े फैसले, उपभोक्ताओं को दी राहत

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार। उपभोक्ता फोरम ने विभिन्न परिवादों का निपटारा करते हुए छह फैसले सुनाते हुए उपभोक्ताओं को राहत दी। अपने फैसलों में उपभोक्ता फोरम के प्रेसिडेंट रघुबीर सिंह और सदस्य सुखबीर कौर ने विभिन्न कंपनियों पर मूल राशि लौटाने के साथ जुर्माना भी लगाया है।
दो किसानों की फसल खराब होने पर बीमा कंपनी द्वारा किसानों को क्लेम नहीं दिए जाने के मामले में फोरम ने बीमा कंपनियों को 95 हजार और 5100 रुपये जुर्माना लगाकर दोनों मामलों में एक लाख रुपये किसानों को हर्जाना देने के आदेश दिए हैं। इसी प्रकार एक उपभोक्ता द्वारा तीन मोबाइल ऑनलाइन मंगवाए गए, लेकिन उसके पास कोरियर द्वारा दो ही मोबाइल आए। इस मामले में कंपनी को 13999 रुपये कीमत और 8000 रुपये हर्जाना लगाया गया। ट्रक का बीमा क्लेम नहीं दिए जाने के मामले में फोरम ने दिए 75 प्रतिशत राशि आठ प्रतिशत ब्याज के साथ देने व 5000 हर्जाना देने के आदेश दिए। एक अन्य मामले में उपभोक्ता को मोबाइल की कीमत 9000 रुपये उपभोक्ता को लौटाने के आदेश कंपनी को दिए। आरसी समय पर नहीं देने पर विपिन मोटर्स पर 8000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
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केस नंबर-1 : बीमा कंपनी ने फसल का नहीं दिया क्लेम
मिरकां निवासी धर्मसिंह ने उपभोक्ता फोरम में दी शिकायत में बताया कि उसके पास 26 कनाल 16 मरले जमीन है। उसने अपनी जमीन पर जीरी की बिजाई की। उसने किसान क्रेडिट कार्ड से 87 हजार रुपये का लोन लिया था। इस बीच अप्रैल 2016 में फसल बीमा योजना लॉन्च हुई। इस योजना के तहत उसकी फसल का बीमा बजाज अलाइंज इंश्योरेंस से किया गया और लाडवा स्थित सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक द्वारा उसकी किस्त की राशि काटी गई। धर्मसिंह के मुताबिक उसकी फसल अच्छी नहीं हुई और जब उसने बीमा क्लेम किया तो उसे बीमा देने से मना कर दिया गया। इस पर उसने 30 अक्तूबर 2017 को उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। अदालत ने कंपनी और बैंक को किसान के नुकसान के 70 हजार रुपये और हर्जाने के 5100 रुपये देने के आदेश दिए।

केस नंबर-2 : फसल खराब होने पर मुआवजा नहीं दिया
मिरकां गांव के किसान एवं धर्मसिंह के भाई ओमप्रकाश ने भी फसल खराब होने पर बीमा राशि न देने पर बजाज अलाइंज इंश्योरेंस और लाडवा स्थित सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी। ओमप्रकाश ने बताया कि उसके पास 27 कनाल 12 मरले भूमि है, जिस पर उसने जीरी की बिजाई की। उसने किसान क्रेडिट कार्ड से दो लाख 40 हजार रुपये का लोन लिया। उसके बाद फसल बीमा योजना लॉन्च होने पर उसकी फसल का बीमा 3 नवंबर 2016 को हुआ। बाकायदा उसकी किस्त भी काटी गई, लेकिन फसल खराब होने पर मुआवजा नहीं दिया गया। फोरम ने बैंक और इंश्योरेंस कंपनी को 25 हजार रुपये 30 दिन के अंदर किसान को देने के आदेश दिए।
केस नंबर-3 : पैकिंग में निकले दो मोबाइल
बरवाला की सीएचसी रोड स्थित कॉलोनी निवासी सुनील कुमार ने फोरम में दी शिकायत में बताया कि उसने जियोमी कंपनी से तीन मोबाइल ऑनलाइन ऑर्डर किए। इसके लिए उसने 35 हजार 997 रुपये का भुगतान किया। 19 मार्च 2018 को उसके पास कोरियर आया, लेकिन उसमें केवल दो ही मोबाइल निकले। कंपनी को मेल किया फिर टोल फ्री नंबर पर कॉल की तो जवाब दिया कि उन्होंने तीन मोबाइल ही भेजे थे। सुनील का आरोप था कि जो पैकिंग थी, उसमें केवल दो ही मोबाइल आ सकते हैं। फोरम ने इस मामले में कंपनी को मोबाइल की कीमत 13999 रुपये और 8000 रुपये हर्जाने के तौर पर उपभोक्ता को 30 दिन के अंदर देने के आदेश दिए।
केस नंबर-4 : दुर्घटना में क्षतिग्रस्त ट्राले का नहीं दिया बीमा
हांसी के सिसाय गांव निवासी शीला पत्नी रमेश ने शिकायत में कहा कि उसने 31 अक्तूबर 2016 को गांधी मार्केट स्थित यूूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के कार्यालय से अपने ट्राले का इंश्योरेंस कराया। 16 जुलाई 2017 को बिछीवाड़ा जिला डुंगरपुर थाने के अंतर्गत लावारिस पशु आगे आने से ट्राला दुर्घटनाग्रस्त हो गया। कंपनी को बताया तो सर्वे किया और उन्होंने कहा कि इसे ठीक करवाकर बिल भेज दो। जब बिल भेजा गया तो कंपनी ने बिल को फर्जी बताते हुए कहा कि दुर्घटना के 11 दिन बाद सूचना दी गई और ड्राइवर का नाम भी गलत है और बिल पास करने से मना कर दिया। फोरम ने इस मामले में बीमा कंपनी को मूल नुकसान की 75 प्रतिशत राशि का भुगतान आठ प्रतिशत ब्याज सहित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही 5000 रुपये जुर्माना भी लगाया।
केस नंबर-5 : कंपनी ने समय पर नहीं दी गाड़ी की आरसी
जींद जिले की नरवाना तहसील के गांव दनौदा खुर्द निवासी सत्यवान ने शिकायत में कहा कि उसने सिरसा रोड स्थित विपिन मोटर्स से 26 जून 2017 को टाटा ऐस गाड़ी खरीदी थी। उसने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) फीस भी जमा कराई थी। सत्यवान के अनुसार कंपनी ने आरसी एक माह के अंदर देने का वादा किया था, लेकिन नहीं दी, जिस कारण वह लोन की किस्तें भी नहीं भर पाया। 29 सितंबर को नोटिस दिया गया, लेकिन फिर भी 20 अक्तूबर 2017 को आरसी दी। इस दौरान उसका काफी नुकसान हुआ। फोरम ने विपिन मोटर्स को 8000 रुपये हर्जाने के रूप में उपभोक्ता को देने के निर्देश दिए।
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केस नंबर-6 : नहीं दिया मोबाइल का इंश्योरेंस
फतेहाबाद के गांव देहमन निवासी अशोक यादव ने फोरम को दी शिकायत में बताया कि उसने 20 दिसंबर 2016 को पुष्पा कॉम्प्लेक्स स्थित सच मोबाइल शॉप से 9000 रुपये में माइक्रो मैक्स का मोबाइल खरीदा और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से उसका बीमा भी कराया। 25 फरवरी 2017 को वह बाइक से जा रहा था तो भूना बस स्टैंड के समीप जेब से मोबाइल गिर गया। उसने उठाया तो वह क्षतिग्रस्त हो चुका था। कंपनी के सर्विस सेंटर दिखाया तो उन्होंने कहा कि यह ठीक नहीं हो पाएगा। फोरम ने कंपनी को मोबाइल की मूल कीमत 9000 रुपये एक माह में उपभोक्ता को लौटाने का आदेश दिया।
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