अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 49वें प्रांत अधिवेशन का रविवार को समापन हो गया। तीसरे दिन अभाविप हरियाणा की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। अधिवेशन के तीसरे दिन अभाविप के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर मिलिंद मराठे ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सुधार के पारित किए जाने वाले दो प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। पहला प्रस्ताव हरियाणा प्रदेश के वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य पर पारित किया गया। इसमें शिक्षण संस्थानों में रिक्त पड़े पदों को जल्द भरने, शिक्षण संस्थानों में पुस्तकालयों और प्रयोगशालाओं की स्थिति में सुधार लाने, स्नातक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली को बंद किए जाने, एसएफएस के नाम पर शिक्षा का व्यापारीकरण बंद करने, महाविद्यालयों में पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास रूम, प्रयोगशालाओं की सुविधा बेहतर तरीके से उपलब्ध करवाने, विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध को प्रोत्साहन देने हेतु ढांचागत नीति का निर्माण करने, प्रदेश के एकमात्र कृषि विश्वविद्यालय का ढांचागत विकास करके उसे साधारण विद्यार्थी की पहुंच में लाया जाए। खंड स्तर पर कृषि मॉडल स्कूल खोले जाएं। मॉडल सांस्कृतिक विद्यालयों का भी खंड स्तर तक विस्तार किया जाए, ताकि अच्छी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। शिक्षा को रोजगार परक बनाया जाए। परीक्षा को पूर्णत: नकल रहित करके परिणाम तय समय सीमा में जारी किया जाए। पुनर्मूल्याकंन में यदि किसी छात्र के पांच प्रतिशत से अधिक अंक बढ़ते हैं तो उसकी फीस वापस की जाए। पांचवीं और आठवीं कक्षा का बोर्ड पुन: लागू किया जाए। दूसरे प्रस्ताव में हरियाणा के वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में प्रदेश में महिलाओं के साथ होने वाली अमानवीय दुष्कर्म जैसी घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच करके फास्टट्रैक कोर्ट की तर्ज पर जल्द फैसला लेकर कानून व्यवस्था को पूर्ण रूप बहाल किया जाए। बाल अपराधों की रोकथाम के लिए स्कूली स्तर पर बच्चों का नैतिक विकास किया जाए। प्रदेश में राजनीतिक स्वार्थो के चलते बिगड़ते सामाजिक माहौल को सुधारने के लिए समाज में समरसता लाने के लिए अधिक से अधिक प्रयास किए जाए।
अभाविप की नई प्रांत कार्यकारिणी की घोषणा
अभाविप के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष प्राध्यापक राजेंद्र धीमान ने समापन अवसर पर प्रांत की नई कार्यकारिणी की घोषणा की। इसमें डॉ. रंजना अग्रवाल, डॉ. आशुतोष, डॉ. जोगेंद्र बल्हारा,डॉ राजेश परमार, संदीप भारद्वाज का प्रांत उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। रजत मंत्री, कर्ण सरना, हितैष यादव, नरेंद्र यादव को प्रदेश सहमंत्री, नितेश कपूर को प्रांत कोषाध्यक्ष, संदीप आजाद को प्रांत कार्यालय मंत्री का दायित्व सौंपा गया।
पांच साल की नौकरी के बाद शिक्षकों के लिए तीन विकल्प : मराठे
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर मिलिंद अपने भाषण में बताया कि शिक्षक की पांच साल नौकरी होने के बाद उन्हें कॅरिअर के तीन क्षेत्रों में आगे बढ़ाना चाहिए। प्रशासन, एडवांस लर्निंग के तरीके और रिसर्च। अगर कोई शिक्षक प्रशासन चुने तो उसको अच्छा प्रशासनिक अधिकारी तैयार करने में जुटा देना चाहिए। कोई शिक्षक दूसरा विकल्प चुने तो उसे अध्ययन के नए और एडवांस तरीकों को तलाशना चाहिए। तीसरा विकल्प चुनते हुए शिक्षक सिर्फ शोध के क्षेत्र में काम करें। इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना साकार होगा और शिक्षक भी महारत हासिल कर सके। प्रो. मराठे विश्वास स्कूल में चल रहे परिषद के 49वें प्रांत अधिवेशन के अंतिम दिन शिक्षा सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा में भारतीयता होनी चाहिए। मुगलों से ज्यादा ब्रिटिश साम्राज्य ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। मैकाले और मैक्स मूलर ने शिक्षा में हमारे मूल मूल्यों को समाप्त कर अपनी नीतियों को आगे बढ़ाया। इसका दंश हम आज भी झेल रहे हैं।
शिक्षा के साथ सामाजिक कार्यों से भी जोड़ें विद्यार्थी
प्रो. मराठे ने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ उन्हें सामाजिक कार्यों से भी जोड़ने की जरूरत है। ऐसा अनिवार्य प्रावधान होना चाहिए कि शिक्षा पूरी करने के बाद तीन महीने के लिए विद्यार्थी से सामाजिक कार्य करवाया जाए। इससे बच्चे संस्कारवान भी बनेंगे। अगर 20 फीसदी बच्चे भी सामाजिक कार्यों से जुड़े तो भी देश को बड़ा फायदा होगा। इस तरह देश के हर बच्चे का चहुमुखी विकास हो पाएगा। प्रो. मराठे ने कहा कि आज के समय में प्रोफेशनल शिक्षा दूर होती जा रही है। एक पिता के लिए दो बच्चों को मेडिकल की पढ़ाई करवा पाना मुश्किल है। आम आदमी सस्ती और गुणवत्तापूर्वक शिक्षा चाहता है। मगर गुणवत्तापूर्वक शिक्षा का मतलब ही महंगी शिक्षा बना दिया गया है। इस विषय में भी चिंतन की जरूरत है। प्रोफेशनल शिक्षा को हर विद्यार्थी की पहुंच में रखना होगा।