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तीन साल बाद भी बीकानेर मंडल के दूसरे सबसे बड़े वाशिंग यार्ड में पूरी नहीं हो पाई पानी की आपूर्ति

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तीन साल बाद भी बीकानेर मंडल के दूसरे सबसे बड़े वाशिंग यार्ड में पूरी नहीं हो पाई पानी की आपूर्ति
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हिसार। हिसार में बने बीकानेर रेलवे मंडल के दूसरे सबसे बड़े वाशिंग यार्ड में तीन साल बाद भी पानी की आपूर्ति पूरी नहीं हो पाई है। करीब आठ करोड़ से निर्मित वाशिंग यार्ड को तीन साल में रेलवे प्रशासन सिर्फ कामचलाऊ ही बना पाया है। वाशिंग यार्ड में रोजाना तीन लाख लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन उपलब्ध सिर्फ 10 हजार लीटर पानी ही है। इस कारण भिवानी से हिसार तक ट्रेनों की आवाजाही बढ़ाई नहीं जा सकी। अगर पानी की क्षमता पूरी हो तो भिवानी तक रुकने वाली ट्रेनों को हिसार तक बढ़ाया जा सकता है।
गौरतलब है कि अप्रैल 2016 में तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने वाशिंग यार्ड का शिलान्यास किया था। शिलान्यास करते समय रेलवे अधिकारियों ने दावा किया था कि यह वाशिंग यार्ड साल 2017 के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा। मगर तीन वर्ष बाद भी वाशिंग यार्ड का निर्माण अधर में है। रेलवे अधिकारी भी कई बार विभाग को इसके बारे मेें अवगत करवा चुके हैं।
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अधूरे इंतजामों से भिवानी खड़ी होती हैं चार एक्सप्रेस गाड़ियां
फिलहाल वाशिंग यार्ड में ट्रेन वॉश करने के लिए सिर्फ एक ही ट्रैक बन पाया है। एक समय एक ही ट्रेन वॉश की जा सकती है। वाशिंग यार्ड एरिया में वाशिंग के लिए आने वाली गाड़ी खड़ी करने के लिए भी अतिरिक्त ट्रैक नहीं बना है। इससे चार एक्सप्रेस गाड़ियों को भिवानी रेलवे स्टेशन व दो गाड़ियों को हिसार रेलवे स्टेशन पर खड़ा करना पड़ता है। अगर वाशिंग यार्ड का कार्य पूरा हो जाता है तो भिवानी ठहरने वाली एकता एक्सप्रेस, कालिंदी एक्सप्रेस सहित अन्य दो एक्सप्रेस गाड़ियां हिसार तक आना-जाना करेंगी। इससे हिसार को चार एक्सप्रेस गाड़ियों की सौगात और मिल जाएगी, जिसका सीधा फायदा रेलयात्रियों को होगा।
अब तक तीन लाख लीटर स्टोरेज के लिए टैंक तक नहीं बना
फिलहाल वाशिंग यार्ड के लिए सिर्फ 5-5 हजार लीटर की प्लास्टिक की टंकियां हैं। इससे ट्रेन वॉश करने के लिए प्रेशर भी पूरा नहीं बनता। हाई प्रेशर बनाने लिए मशीन का प्रयोग किया जा रहा है। इससे बिजली की खपत भी ज्यादा होती है। ट्रेन वेटिंग ट्रैक नहीं बन पाया है। हिसार स्थित वाशिंग यार्ड में मुख्य रूप से मेंटेनेंस से जुड़े कार्य भी किए जाएंगे। वाशिंग यार्ड तैयार होने के बाद बीकानेर, अंबाला, दिल्ली मंडल से जुड़ी लंबी दूरियों की गाड़ियां काम के लिए हिसार से होकर निकलेंगी। इससे स्थानीय यात्रियों को बड़े स्टेशनों के लिए बेहतर रेलगाड़ियों की सुविधाएं मिलेंगी।
ये कार्य हैं पेंडिंग
-- अब तक लाइटिंग का कार्य पूरा नहीं हुआ है
-- न ही मेंटेनेंस की मशीनें आई हैं
-- कर्मचारियों के लिए आवासीय कॉलोनी बननी शुरू नहीं हुई है
-- तीन लाख लीटर क्षमता वाले टैंक का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
-- स्टाफ भी पर्याप्त नहीं किया गया है

गाड़ी वाशिंग करने के लिए भिवानी से मंगाया जा रहा है स्टाफ
फिलहाल कोयंबटूर और सिकंदराबाद जाने वाली एक्सप्रेस गाड़ियों की वाशिंग होती है। वाशिंग यार्ड चलाने के लिए रेलवे को स्टाफ भिवानी से मंगवाना पड़ रहा है। जब वाशिंग यार्ड पर वॉश होने के लिए गाड़ी लगती है तो स्टाफ भिवानी से हिसार आता है। तब तक यही स्टाफ सदस्य भिवानी में भी वाशिंग का कार्य करते हैं।
दूूसरा बड़ा वाशिंग यार्ड
हिसार में बनने वाला वाशिंग यार्ड साल 2017 में बनकर तैयार होना था। हिसार जोन में भिवानी में भी वाशिंग यार्ड है, लेकिन वह काफी पुराना है और सुविधाएं भी नाममात्र हैं। रेलवे के बीकानेर मंडल में हिसार का वाशिंग यार्ड दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है। पहला बड़ा वाशिंग यार्ड मंडल के हेडक्वार्टर बीकानेर का है। हालांकि श्रीगंगानगर में भी वाशिंग यार्ड बन रहा है, मगर हिसार का वाशिंग यार्ड इससे बड़ा होगा। इसमें सभी तरह की आधुनिक सुविधाएं होंगी।
वर्जन
हमारे पास सिर्फ 10 हजार लीटर पानी है। वाशिंग यार्ड के लिए करीब तीन लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। स्टाफ की भी कमी है। पेंडिंग कार्य पूरा करवाने के लिए विभाग को डिमांड भेज दी है। रेलवे इसी कोशिश में लगा हुआ है कि वाशिंग यार्ड का कार्य जल्द पूरा हो जाए।
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- महेंद्र शर्मा, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, रेलवे
वाशिंग यार्ड का निर्माण कार्य तो लगभग पूरा हो चुका है। मगर इक्यूपमेंट आने की कमी है। सभी इक्यूपमेंट आते ही गाड़ी की मेंटेनेंस, वाशिंग का कार्य सुचारु रूप से शुरू हो जाएगा। इसके लिए उच्च अधिकारियों की कोशिश जारी है। जो कार्य पेंडिंग है, उम्मीद वह भी जल्द ही पूरे हो जाएंगे।
- महेंद्रपाल चुघ, रेलवे स्टेशन अधीक्षक।
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