अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में दूसरे दिन भी अन्य विभागों के कर्मचारियों की हड़ताल जारी रही। सबसे अधिक काम बिजली निगम और जनस्वास्थ्य विभाग का प्रभावित हुआ। बिजली निगम में बिलिंग और मीटर वेरिफिकेशन से संबंधित कामकाज पूरी तरह ठप रहा। किसी भी गलत बिल को ठीक नहीं किया जा सका और खराब मीटरों को ठीक नहीं किया जा सका। वहीं बिजली निगम प्रबंधन द्वारा सभी बिजली घरों के लिए पुलिस फोर्स मांगी गई। अधिकारियों ने एक-एक पुलिसकर्मी प्रत्येक बिजली घर पर तैनात करने को कहा। वहीं दिन भर पुलिस की पीसीआर बिजली घरों के आसपास गश्त करती रही।
उधर, रोडवेज प्रशासन की ओर से पिछले 15 दिनों से नाइट स्टे के लिए निर्धारित स्थानों पर खड़ी 48 बसों को वापस मंगवा लिया गया है। खुद वर्कशॉप मैनेजर ड्राइवरों को साथ लेकर बसों को वापस लाए। इन बसों को 15 अक्तूबर को रूटों पर भेजा गया था। रात को गांवों में बस खड़ी करने के बाद से ड्राइवर हड़ताल पर चले गए जबकि बसें वहीं खड़ी रही।
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सारा दिन रहे फील्ड में
कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सारा दिन फील्ड में रहना पड़ा। अलग-अलग बूस्टिंग स्टेशनों और जल घरों पर जाकर अधिकारी हालात जांचते रहे। एसडीओ, एक्सईएन से लेकर एसई भी लगातार अनुबंधित कर्मचारियों से कामकाज संभलवाते रहे ताकि किसी भी तरह से वाटर सप्लाई या सीवरेज सिस्टम के काम में बाधा न आए।
दूसरे दिन बिजली निगम में बढ़ी हड़ताली कर्मियों की संख्या
वहीं बिजली निगम में दूसरे दिन हड़ताली कर्मचारियों की संख्या में इजाफा हुआ। कुल 1188 कर्मचारियों में से मंगलवार को जहां 981 कर्मचारी हड़ताल पर थे, वहीं बुधवार को यह संख्या 1019 तक पहुंच गई। शहर में लाइन संबंधी कामकाज निजी कंपनी के हवाले होने के कारण किसी तरह की परेशानी नहीं आई। वहीं अन्य बिजली घरों में अनुबंधित कर्मचारियों को सप्लाई शिफ्टिंग तक के काम में जुटाया गया।
165 बसों को रूटों पर दौड़ाया
रोडवेज प्रबंधन की ओर से बुधवार को भी 165 बसों को रूटों पर भेजा गया। चंडीगढ़, दिल्ली, पानीपत, गुरुग्राम जैसे लंबे रूटों पर अधिक बसों को चलाया गया ताकि लंबी दूरी के यात्रियों को सफर में कोई दिक्कत न आए। इसके अलावा लोकल रूटों पर भी बसों को भेजा गया। रोडवेज प्रबंधन द्वारा 126 कंडक्टरों और 132 ड्राइवरों को आउटसोर्सिंग पॉलिसी-टू के तहत लेकर बसों का परिचालन करवाया जा रहा है। हालांकि नौसिखिया ड्राइवरों और कंडक्टरों के हवाले बस होने के कारण यात्रियों में असुरक्षा का भाव रहता है।
कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
सर्व कर्मचारी संघ की ओर से शहर में प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ रोष जताया गया। जिला प्रधान सुरेंद्र मान के नेतृत्व में सभी विभागों के कर्मचारियों ने प्रदर्शन करते हुए चेतावनी दी कि रोडवेज विभाग का निजीकरण करने का फैसला सरकार को वापस लेना होगा। अगर फैसला वापस नहीं हुआ तो कर्मचारी इससे भी बड़ा संघर्ष करेंगे। मान ने कहा कि भाजपा सरकार हर विभाग का निजीकरण करने पर तुली हुई है। इससे रोजगार के अवसर समाप्त हो रहे हैं। पढ़े-लिखे युवाओं को 5 से 10 हजार रुपये का मजदूर बनाकर शोषण करने की कोशिश हो रही है।
बिजली घरों पर एक-एक पुलिसकर्मी तैनात करने के लिए निगम अधिकारियों द्वारा पुलिस प्रशासन को लिखा गया था। दिन में पुलिस की पीसीआर भी गश्त करती रही हैं। हमारा बिलिंग और वेरिफिकेशन से संबंधित कामकाज बाधित हुआ है।
रविंद्र घनघस, एसडीओ, बिजली निगम
नाइट स्टे के बाद काफी बसों को ड्राइवर वापस नहीं लेकर आए थे। उन बसों को अब वापस मंगवा लिया गया है। 165 बसों को रूटों पर भेजा जा रहा है। जरूरत पड़ी तो और भी बसें चला दी जाएंगी। सवारियों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है।
एएस मान, एडीसी एवं कार्यवाहक महाप्रबंधक रोडवेज