अमर उजाला ब्यूरो
हिसार/बालसमंद। गांव बालसमंद से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित ढाणी में बनाए गए बोरवेल में बुधवार शाम 5 बजकर 20 मिनट पर डेढ़ साल का मासूम गिर गया। मासूम नदीम अपनी मां, बड़ी बहन, बड़े भाई व तीन-चार अन्य बच्चों के साथ बेर खाने के लिए इस तरफ आया था। तभी अचानक दस दिन पहले खोदे गए बोरवेल में नदीम गिर गया। नदीम के बोरवेल में गिरते ही अन्य बच्चों ने चिल्लाना शुरू कर दिया। तभी आसपास खेतों में काम कर रहे किसान व परिजन मौके पर पहुंचे। उन्होंने मामले की सूचना बालसमंद चौकी पुलिस व सदर थाना पुलिस के पास दी। आखिरकार हालात देखते हुए आर्मी को बुलाया गया। शाम सात बजे कैंट से पहुंची आर्मी की टीम ने देर रात 8:41 बजे मासूम नदीम को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए जेसीबी से बोरवेल के आसपास खुदाई शुरू की। समाचार लिखे जाने तक चार जेसीबी खुदाई करने में जुटी हुई थी।
सूचना पाकर उपायुक्त अशोक कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक शिवचरण, बीडीपीओ संदीप भारद्वाज, तहसीलदार संजय बिश्नोई मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। फायर ब्रिगेड की गाड़ी के अलावा आर्य नगर और बालसमंद से एंबुलेंस भी मंगवा ली गई। आर्यनगर सीएचसी के एसएमओ अपनी टीम के साथ मौके पर डटे रहे।
डेढ़ घंटे तक तकनीक अपनाने के लिए मशविरा करते रहे अधिकारी
अधिकारियों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए तकनीक अपनाने की रही। डीसी-एसपी के साथ आर्मी के अधिकारी करीब डेढ़ घंटे तक सलाह-मशविरा करते रहे। बीच-बीच में अधिकारी बोरवेल के पास जाकर बच्चे के रोने की आवाज भी सुनते रहे, जिससे उसकी स्थिति की जानकारी मिल सके। इसी बीच हिसार से बोरवेल खुदाई करने वाली मशीन भी मंगवाई गई। मगर उसके आने में देरी होती देख आखिरकार 8 बजकर 41 मिनट पर जेसीबी से ही बोरवेल के साथ 15 मीटर दूर से जगह खोदनी शुरू की गई। कुछ देर बाद एक और मशीन मंगवाई गई। उसको भी खुदाई में लगाया गया। इस तरह खुदाई में चार जेसीबी लगाई गईं।
10 दिन पहले पंचायती जमीन पर तेलूराम ने खुदवाया बोरवेल
ग्रामीणों के अनुसार जिस जगह पर बोरवेल खोदा गया है, वह पंचायती जमीन पर है। मगर यह बोरवेल गांव के ही तेलूराम ने दस दिन पहले ही खुदवाया है। इसमें सबसे बड़ी लापरवाही यह बरती गई है कि बोरवेल खोदने के बाद उसे खुला छोड़ दिया गया। न तो उसको ढका गया और न ही सुरक्षा के अन्य कोई प्रबंध किए गए।
रस्से लगाकर ग्रामीणों को किया दूर
ज्यों-ज्यों घटना की जानकारी मिलती गई, त्यों-त्यों लोगों का जमावड़ा ढाणी में लगता रहा। सैकड़ों की संख्या में आसपास के लोग वहां पहुंच गए। इस कारण पुलिस ने सबसे पहले रस्से बांधकर बोरवेल की जगह से आसपास के ग्रामीणों को करीब एक एकड़ की दूरी पर खड़ा किया। किसी को भी बोरवेल के नजदीक नहीं जाने दिया गया। यहां तक की परिजनों को भी रोक दिया गया।
पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा है नदीम
दरअसल, ढाणी निवासी आजम खान चिनाई मिस्त्री का काम करता है। पहले वह ईरान में काम करता था। तीन साल से यहीं रह रहा है। उसकी तीन बेटी व दो बेटे हैं। बड़ा बेटा 12 वर्षीय समीर खान दिव्यांग हैं, जबकि बड़ी बेटी आईना 14 साल की है। इसके अलावा आइसा आठ साल और साजिदा पांच साल की है। जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय आजम अपने काम पर गया हुआ था, जबकि अन्य परिजन ढाणी में ही काम पर लगे हुए थे।
पाइप से की ऑक्सीजन की व्यवस्था
बोरवेल में गिरे बच्चे को सांस लेने में कोई तकलीफ न हो, इसलिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब 6:20 बजे पाइप बोरवेल में डालकर उसको ऑक्सीजन सिलिंडर से जोड़ा। इस पाइप के जरिये बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचती रही।