अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। जिले के एक गांव में भतीजी से दुष्कर्म करने के दोषी चाचा को एडीजे डॉ. पंकज की अदालत ने वीरवार को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास और 11 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। एडीजे डॉ. पंकज की अदालत ने उसे 16 फरवरी को दोषी करार दिया था।
मामले के अनुसार पीड़ित के माता-पिता का देहांत हो चुका था। वह अपने दादा-दादी और चाचा के साथ रहती थी। नाबालिग करीब सात माह की गर्भवती हुई तो आरोपी उसे गर्भपात के लिए ले जा रहा था। इसी दौरान पुलिस को सूत्रों से मामले की जानकारी मिली तो आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इस संबंध में वर्ष 2017 में आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
पीड़िता ने रोहतक पीजीआई में दिया था बच्चे को जन्म
बता दें कि किशोरी की दादी ने पोती के गर्भपात कराने के लिए कोर्ट से इजाजत मांगी थी। मामले में डॉक्टरों के बोर्ड ने पीड़िता की जान को खतरा बताते हुए गर्भपात की इजाजत नहीं दी थी। इस पर पीड़िता ने रोहतक पीजीआई में बच्चे को जन्म दिया था।
किन धाराओं में क्या सजा
धारा - सजा - जुर्माना
376-2 (एफ) - अंतिम सांस तक आजीवन कारावास - 2000 रुपये
376-2 (आई) - अंतिम सांस तक आजीवन कारावास - 2000 रुपये
376-2(एन) - अंतिम सांस तक आजीवन कारावास - 2000 रुपये
6 पोक्सो एक्ट - आजीवन कारावास - 5000 रुपये