अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
प्रदेश सरकार की हरपथ एप पर 72 घंटे तो क्या 672 घंटों में भी शिकायत का समाधान नहीं हो रहा। आम शहरवासी तो क्या शहर के डिप्टी मेयर भी सड़कों के गड्ढे नहीं भरवा पा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि 28 दिन बाद डिप्टी मेयर की शिकायत पर अधिकारियों ने संज्ञान नहीं लिया है। ऐसे में गुड गवर्नेंस के दावे भी दम तोड़ते जा रहे हैं। भाजपा सरकार ने सड़कों के गड्ढों से संबंधित शिकायत देने के लिए हरपथ एप जारी कर रखी है। इस पर कोई भी व्यक्ति सड़क के गड्ढों की फोटो खींचकर अपलोड कर सकता है। उसके बाद निर्धारित समय अवधि में समस्या का समाधान होगा।
दो मई को की शिकायत
डिप्टी मेयर के मुताबिक दो मई को गंदा नाला वाली गली की फोटो अपलोड की थी। यहां बड़ा गड्ढा हो चुका है, जो दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। सात मई को शिकायत स्वीकार भी कर ली गई, लेकिन अभी तक गड्ढे को नहीं भरा गया है। इसी तरह दो मई को ही जहाजपुल पर डैमेज रोड की भी फोटो भेजी गई। दोनों शिकायतों का 28 दिन बाद भी समाधान नहीं हुआ।
आठ मई की शिकायत
इसी तरह आठ मई को न्यू शांति नगर में भी डैमेज रोड की फोटो खींचकर हरपथ एप पर अपलोड की गई। इस शिकायत को तो 13 दिन बाद 21 मई को स्वीकार किया गया। अभी तक गड्ढे ठीक नहीं हुए हैं।
11 मई की शिकायत
इसके अलावा 11 मई को 12 क्वार्टर रोड की गली नंबर 15 की खस्ता हालत की फोटो भी अपलोड की गई। इस शिकायत को 28 मई को स्वीकार किया गया, लेकिन अभी तक कोई हालात नहीं बदले हैं।
23 मई की शिकायत
23 मई को विवेक नगर में स्कूल वाली गली में डैमेज सड़क की फोटो अपलोड की गई। शिकायत देकर रोड की मरम्मत करवाने की मांग की गई। एप पर जानकारी दी गई कि सात दिन में समस्या का समाधान होगा, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
सीएम के टेक्निकल एडवाइजर भी दे चुके हैं निर्देश
कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री के टेक्निकल एडवाइजर विशाल सेठ भी नगर निगम के अधिकारियों की क्लास लेकर उन्हें तत्परता से शिकायतों को निपटाने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बाद भी अधिकारी समस्याओं का समय रहते समाधान करने के प्रति गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। टेक्निकल एडवाइजर ने ऐप को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी कदम उठाए थे। मगर अधिकारियों की मनमानी सरकार के दावों की पोल खोल रही है।
वर्जन
कई सड़कों के गड्ढों और टूट रोड की फोटो हरपथ एप पर अपलोड कर चुके हैं, लेकिन अभी तक एक भी शिकायत का समाधान नहीं हुआ है। कुछ शिकायतों के निपटान के लिए तो सात दिन का समय दिया जाता है, लेकिन इतनी अवधि में भी समाधान नहीं होता। अधिकारियों को गंभीरता दिखाने की जरूरत है।
-भीम महाजन, डिप्टी मेयर, नगर निगम