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भगाना में मानवाधिकार आयोग की टीम ने किया दौरा, सुनी दलितों की समस्याएं

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
प्लॉट व सामाजिक बहिष्कार मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की टीम बुधवार को गांव भगाना पहुंची। टीम में रिटायर्ड आईएएस एके जैन ने पहले लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे लोगों से बातचीत की। इसके बाद गांव में पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए और उनकी समस्या जानी। प्रशासन के अधिकारी एसडीएम अशोक बंसल, डीएसपी जयपाल सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद थे। गांव के पंचायत भवन में दोनों पक्षों के बयान कलमबद्ध किए गए। आयोग की टीम वीरवार को उपायुक्त के साथ इस बारे में बैठक करेगी।
रिटायर्ड आईएएस गांव में पीड़ित परिवारों से मिले और प्लाटों और अन्य सुविधाओं बारे जानकारी ली। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि उनका सामाजिक बहिष्कार किया हुआ है। वे गांव जाना ही नहीं चाहते। हालांकि कई ग्रामीणों ने धरने पर बैठे लोगों द्वारा भाईचारा खराब करने की बात भी कही गई। भगाना निवासी रामकिशन व मलाराम ने आयोग को बताया कि जो दिल्ली धरना लगाकर बैठें हैं वो लोग धरना प्रदर्शन से अपनी रोजी रोटी चलातेे हैं व पैसा कमातेे हैं। उन्होंने गांव का भाईचारा बिगाड़ रखा है।
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कुछ बोले प्लॉट मिले मगर गांव से तीन किलोमीटर दूर
गांव के दलित समाज के लोगों के प्रतिनिधि मलाराम ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि साहब हमको प्लाट तो मिल गए परंतु है गांव से तीन किलोमीटर दूर। ये प्लाट हमारे किसी काम के नहीं है। हमको प्लाट अपनी बस्ती के नजदीक ही मिलने चाहिए।
महेंद्र सिंह ने बताया कि यहां 251 परिवार धरने पर बैठे हैं। लेकिन संख्या कम होने बारे वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने प्रशासन पर गुमराह करने का भी आरोप लगाया। इस दौरान कुछ लोगों ने बताया कि किसी का कोई सामाजिक बहिष्कार नहीं है।

123 की हो चुकी है रजिस्ट्री, 99 की बाकी
यह जरूर बात सामने रखी कि 222 परिवारों को प्लाट मिलने थे। 123 प्लाटों की रजिस्ट्री हो चुकी है। 99 प्लाटों की अभी रजिस्ट्री होनी बाकी है। लेकिन ये प्लाट उनकी कालोनी के पास ही दिए जाएं। जो प्लाट काटे हुए हैं वे काफी दूर हैं।
विरेंद्र सिंह बगोरिया ने कहा कि दलित समाज के सरपंच नेे हमारे लोगों को प्लाट देने का काम टीबे की जमीन पर शुरू कर दिया था। दलित सरपंच को डराया गया व धमकाया गया। डर के मारे दलित सरपंच ने प्लाट काटने बंद कर दिए। स्वर्ण समाज की पंचायत बनने के बाद इन लोगों ने पीड़ितों के प्लाट जबरदस्ती दूसरी जगह पर काट दिये। इस जगह पर कोई भी दलित प्लाट लेने के इच्छुक नहीं है। जो लोग यहां से बायकाट होकर बाहर चले गए वो लोग यहां रहना नहीं चाहतें हैं। काफी लोग भगाना से स्थाई रूप में ही बाहर चले गए। यहां पर उनकी जान, इज्जत सुरक्षित नहीं है।
इस मौके पर एसडीएम अशोक बंसल, जिला विकास पंचायत अधिकारी अश्वीर नैन, डीएसपी जयपाल सिहं, एसएचओ देवेंद्र सिंह नैन, रवि कुमार डीडीपीओ, तहसीलदार हरकेश गुप्ता, पचांयत अधिकारी दलबीर सिंह, कानूनगो जगदीश चंद्र, ग्राम सचिव सुरेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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काजला बोले किसी सूरत में नहीं जाएंगे गांव में
भगाणा कांड संघर्ष समिति के सदस्य सतीश काजला ने कहा कि वे किसी भी सूरत में गांव में नहीं जाएंगे। सरकार उनके साथ न्याय करना चाहती है तो शहर के आसपास पुनर्वास हो। उनकी आर्थिक नुकसान की भरपाई हो। आरोपियों को सजा दिलवाई जाए।

फोटो संख्या 40, से 42
भगाना के पीड़ित लोगों से मिली मानवाधिकार आयोग की टीम गांव में भी जाने हालात, प्लाटों बारे ली जानकारी
- आज डीसी से बात करेगी टीम
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