हिसार। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ. आरएस परोदा ने कृषि को लाभदायक व्यवसाय बनाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों और नीति निर्धारकों से कृषि की विभिन्न चुनौतियों पर नवीन सोच के साथ विचार करके समाधान निकालने का आह्वान किया। डॉ. परोदा सोमवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर माइक्रोप्रोपागेशन एंड डबल हैप्पलॉयड की आधारशिला रखने के बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ एकेडमिक एंड रिसर्च कोलाबोरेशन (स्पार्क) परियोजनाओं के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
डॉ. परोदा ने कहा कि घट रही कृषि जोत, ग्लोबल वार्मिंग, क्षीण हो रही भू-उर्वरता, कृषि रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग के साथ अन्य जैविक व अजैविक दबाव कृषि उत्पादन के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों को इनका यथाशीघ्र हल खोजना चाहिए, ताकि कृषि उत्पादन में स्थिरता लाई जा सके। उन्होंने कहा किसानों को सब्सिडी की नहीं, बल्कि ऐसे कृषि ज्ञान या कृषि प्रौद्योगिकी की जरूरत है, जो उनकी खेती की आमदनी बढ़ा सके। उन्होंने कहा खेती लाभकारी होगी तो खेती से विमुख हो रही युवा पीढ़ी भी शहरों की ओर रुख नहीं करेगी। कुलपति प्रो. केपी सिंह ने स्पार्क के तहत छह योजनाएं प्राप्त करने वाले विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को बधाई दी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मेसाचुसेट्स के प्रोफेसर डॉ. ओपी धनखड़ ने कहा कि कृषि की चुनौतियों के समाधान के बिना निरंतर बढ़ रही जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा मुहैया कराना संभव नहीं हो सकता।
स्पार्क परियोजनाओं के ये हैं मुख्य अन्वेषक
इस अवसर पर स्पार्क योजना के तहत हकृवि को मिली छह परियोजनाओं के मुख्य अन्वेषकों डॉ. पुष्पा खरब, डॉ. एसएस धनखड़, डॉ. विनोद गोयल, डॉ. अक्से भुक्कर, डॉ. रेणु मुंजाल और डॉ. योगेंद्र कुमार यादव को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इन वैज्ञानिकों ने अपनी अनुसंधान परियोजना की प्रस्तुति भी दी। इस अवसर पर हकृवि के अनुसंधान निदेशक एवं स्पार्क परियोजनाओं के संयोजक डॉ. एसके सहरावत, बेसिक साइंस कॉलेज के डीन डॉ. राजवीर सिंह भी मौजूद थे।