न जीएम, न टीएम, अधिकारियों के अभाव में बेपटरी रोडवेज की व्यवस्था
-- डब्ल्यूएम और एसपीओ के पद भी खाली पड़े
- रोडवेज में अधिकारी नहीं होने से काम हुए बाधित
-- रोजाना आ रहीं रूट मिस की सबसे ज्यादा शिकायतें, सुनने वाला कोई नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। लोकल से लेकर लंबे रूट पर पहले ही रूट मिस की शिकायतें आ रही थीं, लेकिन अब रोडवेज महाप्रबंधक की कुर्सी खाली होने के बाद रोडवेज की व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई है। आलम यह है कि रोडवेज में न तो जीएम है और न ही ट्रैफिक मैनेजर यानी टीएम। इसके अलावा वर्क्स मैनेजर और एसपीओ के पद भी खाली पड़े हैं, जबकि रोडवेज को चलाने में इन सभी आला अधिकारियों की अहम भूमिका होती हैं। ऐेसे में अब रोडवेज की व्यवस्था की निगरानी के लिए कोई भी आला अधिकारी नहीं है। वहीं सभी काम भी पूरी तरह बाधित हो रहे हैं। यहां तक कि रोजाना 30 से 35 रूट मिस की शिकायतें आ रही हैं, जिनको सुनने वाला कोई नहीं है। दिन-प्रतिदिन यात्रियों की समस्या बढ़ती जा रही हैं।
बता दें कि रोडवेज महाप्रबंधक विकास यादव को जिला परिषद हिसार और भिवानी का सीईओ बनाया गया है। इनसे पहले विभाग में टीएम (ट्रैफिक मैनेजर) के पद पर कार्यरत अरविंद शर्मा काफी समय से छुट्टी पर चल रहे हैं। वहीं डब्ल्यूएम (वर्कशॉप मैनेजर) जितेंद्र यादव का चार महीने पहले हिसार से पलवल तबादला हो गया। इसके अलावा एसपीओ (स्टोर परचेज ऑफिसर) भी चार महीने पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हालांकि नगर निगम के नए आयुक्त डॉ. जेके आभीर को मंगलवार दोपहर बाद ही रोडवेज के महाप्रबंधक का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।
इन रूटों पर बसें हो रही मिस
ट्रैफिक मैनेजर नहीं होने से रोडवेज में सबसे ज्यादा शिकायतें रूट मिस की आ रही हैं। इस दौरान यात्रियों को उचाना, लितानी, हसनगढ़ के अलावा फतेहाबाद, सिरसा, डबावाली और गंगानगर जाने वाली बसों की सुविधा नहीं मिल रही है। रोजाना हजारों यात्री रोडवेज बसों में इन रूटों पर सफर करने आते हैं।
इन अधिकारियों का ये होता है काम
जीएम : रोडवेज के सभी काम जीएम की निगरानी में होते हैं। तमाम तरह के बड़े प्रोजेक्ट के दस्तावेज पर जीएम के साइन होते हैं। उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होती है।
टीएम : टीएम का मुख्य काम ट्रैफिक व्यवस्था देखना है। रूट से संबंधित हर समस्या का समाधान करना होता है। किस रूट पर कितनी बसें मिस है और कहां कितने की जरूरत है। मगर टीएम काफी समय से छुट्टी पर होने के कारण सबसे ज्यादा रूट मिस की शिकायतें आ रही है।
डब्ल्यूएम : वर्कशॉप का पूरा काम डब्ल्यूएम यानी वर्क्स मैनेजर की निगरानी में होता है। इसमें बसों का स्पेयर पार्ट कहां से मंगवाना है, किस सामान की कितनी जरूरत है, कौन से मैकेनिक की कहां ड्यूटी लगेगी आदि काम शामिल है।
वर्जन
काफी समय से अधिकारियों की पोस्ट खाली है। काम पूरी तरह बाधित हो चुके है। यात्रियों से लेकर कर्मचारियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
-राजपाल नैन, जिला प्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन
वर्जन
जो भी समस्या आ रही है, उस बारे में बातचीत की जाएगी। यात्रियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर हल निकाला जाएगा।
-अशोक कुमार मीणा, उपायुक्त