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छह महीने पहले पार्षदों ने मेयर को बताई थी वार्डों की समस्याएं, 50 फीसदी का भी समाधान नहीं हुआ

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हिसार। शहर की नई सरकार गठित होने के बाद 22 जनवरी को हुई नगर निगम की पहली बैठक में मेयर के सामने पार्षदों द्वारा रखी गई शिकायतों का छह महीने बाद भी समाधान नहीं हो पाया है। मेयर अधिकारियों से अधिकतर पार्षदों की 50 फीसदी शिकायतों का भी निपटान नहीं करवा सके हैं।
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पिछली बैठक में 323 शिकायतें रखी गई थीं। इनमें से 90 शिकायतें ऐसी थीं, जो सभी पार्षदों द्वारा रखी गई थीं। अधिकतर पार्षदों ने पहली बैठक में ही अपने वार्डों में सफाई की समस्या को मुख्य मुद्दा बताया था। आज तक भी इन पार्षदों को वार्डों की सफाई व्यवस्था सुधरवाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अब पार्षदों का कहना है कि मेयर को हाउस की बैठक बुलाने से पहले समीक्षा बैठक करनी चाहिए। उसमें अधिकारियों से छह महीने पहले हुई बैठक में दी गईं शिकायतों का अभी तक संज्ञान नहीं करने के मामले में जवाब लेना चाहिए।

मेयर के खुद के आदेशों की भी नहीं हुई पालना
उस बैठक में खुद मेयर गौतम सरदाना द्वारा दिए गए निर्देशों की भी आज तक पालना नहीं हुई है। मेयर ने स्वच्छता शाखा के अधिकारियों को प्रत्येक वार्ड में 100 घरों पर 11 लोगों की निगरानी कमेटी बनाने के आदेश दिए थे। मगर अभी तक एक भी वार्ड में ऐसी निगरानी कमेटी नहीं बनाई गई है। इसके अलावा वार्डों में पार्षदों के कार्यालय बनाने के नियमों को देखने के निर्देश दिए गए थे। उसका क्या परिणाम रहा, इसकी भी पार्षदों को जानकारी नहीं दी गई है।
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वार्ड छह के पार्षद बोले, सिर्फ एक मांग पूरी हुई
वार्ड छह के पार्षद डॉ. उमेद खन्ना का कहना है कि उन्होंने पहली बैठक में 11 मुख्य मांगें रखी थीं। इसमें से एक मांग पूरी हुई है। 12 क्वार्टर रोड श्मशान घाट में काम आगे बढ़ा है। मगर बाकी कोई मांग पूरी नहीं हो पाई है। निगम में चक्कर काटकर आ जाते हैं, लेकिन अधिकारियों के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है।

दस सफाईकर्मी बढ़ाने की मांग थी, आज तक नहीं बढ़े
वार्ड सात के पार्षद मनोहर लाल वर्मा का कहना है कि उन्होंने बैठक में 30 शिकायतें रखी थीं। इनमें एक बड़ी मांग सफाईकर्मियों की थी। वार्ड में 19 सफाई कर्मचारी थे। बैठक में उन्होंने वार्ड में 10 सफाई कर्मचारी और लगाने की मांग की थी। मगर आज तक भी कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ी है। हर रोज वार्डवासियों की सफाई व्यवस्था बदहाल होने की शिकायतें आ रही हैं। अधिकारियों से पूछा जाए तो भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। इस बार हाउस की बैठक में पहले पिछली बैठक के मुद्दों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसका जवाब मांगेंगे।

वार्ड 11 की 10 में से एक शिकायत पर सिर्फ 27 फीसदी काम हुआ
वार्ड 11 की पार्षद सरोज बाला की ओर से पिछली बैठक में वार्ड की 10 मुख्य समस्याएं रखी गई थीं। इनमें से नौ समस्याओं को लेकर तो कोई संज्ञान लिया ही नहीं गया। 100 बेंचों की मांग की गई थी, अभी तक सिर्फ 27 बेंच ही मिले हैं। वार्ड 11 के पार्षद प्रतिनिधि कर्मवीर सातरोड़ ने बताया कि बस स्टॉपेज बनवाने की मांग मुख्य थी, लेकिन आज तक स्टॉपेज नहीं बनवाया जा सका है।

पार्कों में सुधार का मुद्दा उठाया था, सिर्फ पांच बेंच मिले
वार्ड 12 के पार्षद जगमोहन मित्तल का कहना है कि उन्होंने 26 मुद्दों का मांग-पत्र सौंपा था। मगर इन मुद्दों पर 10 फीसदी भी काम नहीं हुआ है। वार्ड के पार्कों में सुधार की मांग की थी। सिर्फ पांच बेंच भेजे गए हैं। इसके अलावा कुछ नहीं हुआ। अधिकारियों की काम करने की नीयत ही नहीं है।

पार्षदों के साइन बोर्ड तक नहीं लगवा पाए
नए पार्षदों के चुनाव हुए सात महीने हो चुके हैं, मगर अभी तक निगम प्रशासन वार्डों में पार्षदों के नाम-पते को दर्शाते साइन बोर्ड तक नहीं लगवा पाया है। इसको लेकर भी पार्षदों में नाराजगी है। पार्षदों का कहना है कि बोर्ड लगाने में तो इतना समय नहीं लगना चाहिए था।

पहले लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता लग गई थी। फिर कमिश्नर का तबादला हो गया। अब नए कमिश्नर के आते ही मैंने पिछली बैठक में पार्षदों द्वारा दी गई शिकायतों का स्टेटस उनसे मांग लिया है। हाउस की बैठक से पहले ही स्टेटस रिपोर्ट पर चर्चा करेंगे।
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-गौतम सरदाना, मेयर, नगर निगम
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