हिसार। हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड ने सीएम विंडो को हाथों की कठपुतली बनाकर रख दिया है। इस बोर्ड के खिलाफ 8 से 10 शिकायतें पिछले एक साल के दौरान सीएम विंडो पर की गईं, लेकिन बोर्ड द्वारा अधिकांश में लीपापोती कर दी गई। खास बात यह है कि सीएम विंडो पर की गईं इन सभी शिकायत में बोर्ड के उसी अधिकारी को जांच अधिकारी बना दिया जाता है, जिसके खिलाफ शिकायत की गई होती थी। यही कारण है कि बोर्ड ने इन शिकायतों के साथ फुटबाल की तरह खेल रहा है। बोर्ड के खिलाफ पिछले एक साल के दौरान की लगभग 8 से 10 शिकायतों पर फिलहाल कार्रवाई जारी है। इनमें तीन प्रमुख सीएम विंडो पर शिकायतें हैं, जिन पर बोर्ड अधिकारी सीएम विंडो के अधिकारियों को भी बार-बार बरगला रहे हैं।
पहली शिकायत - फर्जी आरसी लगाई, जांच पूरी नहीं
20 अगस्त 2018 को एक सीएम विंडो लगाई गई, जिसमें हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड द्वारा एग्रीकल्चर ऑपरेशन का टेंडर लगाया गया। इसमें ट्रैक्टर की फर्जी आरसी और एक व्यक्ति का कार्य अनुभव फर्जी होने संबंधी शिकायत दी गई थी। इस मामले में दो के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज हो चुका है, लेकिन मामला उससे आगे नहीं बढ़ रहा है।
दूसरी शिकायत- जांच उसी को, जिसकी शिकायत
इनमें 10 सितंबर 2018 को लगाई गई एक शिकायत, जो सरकारी जमीन पर अवैध रूप से गायों की खाल उतारने का मामला है। इसकी जांच का जिम्मा उसी अधिकारी को दे दिया गया, जिसके खिलाफ शिकायत दी गई थी। इसकी अब तक जांच ही पूरी नहीं हो पाई है। सीएम विंडो पर शिकायत देने वाले प्रदीप का आरोप है कि अधिकारी जानबूझकर इसकी जांच नहीं कर रहे हैं, क्योंकि यह बड़ा गोरखधंधा है।
तीसरी शिकायत पर सीएम विंडो को दी गोली
26 अक्तूबर 2018 को सीएम विंडो पर लगाई शिकायत में जेसीबी की फर्जी आरसी लगाकर टेंडर छुड़ाने का मामला है। इस शिकायत पर अधिकारियों ने सीएम विंडो को ही गोली दे दी। उन्होंने लिख दिया कि आरसी फर्जी पाई, इसलिए टेंडर रद्द कर दिया। जबकि सच्चाई यह है कि जिस समय अधिकारियों ने टेंडर रद्द किया, उस समय टेंडर की अवधि पूरी होने में मात्र एक माह बचा था, लेकिन इसके बावजूद फर्जी आरसी लगाने पर न तो ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई हुई और न ही उन अधिकारियों के खिलाफ, जिन्होंने फर्जी आरसी के बावजूद टेंडर पास किया।
इनके अलावा एक शिकायत आचार संहिता के दौरान गलत तरीके से टेंडर अपने चहेते को दिए जाने व एक अन्य शिकायत में एक ठेके की अवधि खत्म होने के बाद उसकी अवधि 31 मार्च के बाद बढ़ाने की शिकायत दी गई है। इन दोनों शिकायतों के संबंध में शिकायतकर्ता प्रदीप को मंगलवार को बोर्ड के आदान एवं संवितरण अधिकारी डॉ. एसके बगोरिया ने बुलाया था। शिकायतकर्ता प्रदीप का कहना है कि उनके पास एक दिन पहले ही मैसेज आया, लेकिन आज जब वह गया तो वहां पर अधिकारी ही गायब थे।
कोट्स
बोर्ड अधिकारी बार-बार ऐसा ही करते हैं। हमें बुला लेते हैं और फिर खुद नहीं होते। ऐसा करके वे मामले में ज्यादा लंबा खींच ले जाते हैं। एक साल पुरानी सीएम विंडो की भी अभी तक जांच चल रही है। बोर्ड में फर्जीवाड़ा चल रहा है, क्योंकि जिसकी शिकायत सीएम विंडो पर करते हैं, उसकी जांच भी उसी अधिकारी को सौंप दी जाती है। ऐसे में कौन स्वयं को गलत करार देगा।
- प्रदीप, सीएम विंडो पर शिकायतकर्ता।