हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में ‘प्रोड्यूस सेफ्टी एलांन्स ग्रोवर ट्रेनिंग एंड गुड एग्रीकल्चरल प्रेक्टिसेस‘ विषय पर सोमवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला अमेरिका के लुसियाना स्टेट विश्वविद्यालय के एजी सेंटर के सहयोग से आयोजित की गई। इसका मुख्य उद्देेश्य किसानों को कृषि उत्पाद दूसरे देशों में भेजने की बारीकियां सिखाना व प्रोत्साहित करना था। इस कार्यशाला में हरियाणा के विभिन्न जिलों से आए किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला में कुलपति प्रो. केपी सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उत्पादकता में हम आत्मनिर्भर हो गए हैं, पर किसान को सही कीमत न मिलना बड़ी समस्या है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के नियमों को समझकर अपने उत्पाद को दूसरे देशों में भेजकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
प्रो. सिंह ने कहा कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना की गई है, जिसमें किसानों को अपने उत्पाद की पैकेजिंग, भंडारण, परीक्षण, विश्लेषण की प्रक्रिया, आयात-निर्यात के बारे में जानकारी दी जाएगी। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय स्तर की केमिकल टेस्टिंग लैब उपलब्ध है, जो किसानों के उत्पाद में रसायन की प्रतिशत उपलब्धता को बता सकती है। इससे किसान अपने उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिना रोक-टोक के बेच सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रक्रिया पर समग्र सिफारिशें विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। कुलपति ने कहा कि हरियाणा के किसान बहुत मेहनती व जागरूक है। उन्होंने वैज्ञानिक सलाह व तकनीकी सहायता से अपने उत्पाद को बढ़ाने में सफलता हासिल की है, लेकिन बाजार की सही समझ न होने से अपने उत्पाद का सही बाजार मूल्य प्राप्त करने में असमर्थ हैं।
एशिया की पहली कार्यशाला
अमेरिका के लुसियाना स्टेट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, डॉ. अच्युत अधिकारी ने बताया कि यह कार्यशाला प्रोड्यूस सेफ्टी एलांस ग्रोवर ट्रेनिंग एंड गुड एग्रीकल्चरल प्रेक्टिसेस विषय पर आयोजित की गई एशिया में पहली कार्यशाला है। उन्होंने बताया कि ताजे फल व सब्जियों को खराब होने से पहले उचित मूल्य पर उपभोक्ता के पास पहुंचना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, कुलपति के विशेष सलाहकार, डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।