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Hisar News: 12500 अंकों की परीक्षा, स्वच्छ सर्वेक्षण एक मार्च से

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हिसार- स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर आयोजित प्र​शिक्षण ​शिविर में संबो​धित करते निगम आयुक्त नीरज । स
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हिसार। स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत इस बार 12,500 अंक की परीक्षा होगी, जिसमें 43 मानकों और 176 उप मानकों के आधार पर नगर निगमों की रैंकिंग की जाएगी। इस बार 1 मार्च से शुरू होने वाला स्वच्छ सर्वेक्षण प्रमुख होगा जिसमें 10 श्रेणियों के आधार पर अंक दिए जाएंगे। इनमें से 10,500 अंक जमीनी सत्यापन पर और 2,000 अंक नागरिकों के फीडबैक पर आधारित होंगे। इसके लिए मंगलवार को हिसार नगर निगम में कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
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मंडल स्तरीय प्रशिक्षण शिविर में हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, और हांसी के शहरी स्थानीय निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर हिसार नगर निगम के मेयर, प्रवीण पोपली ने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, नियमित रोड स्वीपिंग, सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर दिया।
निगमायुक्त नीरज ने अधिकारियों से अपील की कि वे प्रशिक्षण में दी गई जानकारी को गंभीरता से लें और इसे अपने-अपने नगर निकायों में लागू करें ताकि हर नगर निकाय अच्छा प्रदर्शन कर सके। उन्होंने फिजिबिलिटी क्लीयरेंस की प्रक्रिया पर जोर दिया और कहा कि किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले उसकी तकनीकी, आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक व्यवहार्यता का आकलन किया जाना चाहिए।
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स्वच्छता रैंकिंग में वार्डों का मूल्यांकन
स्वच्छ वार्ड रैंकिंग में प्रत्येक वार्ड का मूल्यांकन सफाई व्यवस्था, कचरा पृथक्करण, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, जल निकासी और नागरिक सहभागिता के आधार पर किया जाएगा। इसके अलावा, कर्मचारियों की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
कचरा प्रबंधन की दी जानकारी
यूएलबी मुख्यालय से आए स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक शाश्वत सांगवान ने मिशन शहरी 2.0 के उद्देश्यों, कार्य योजना, फंडिंग पैटर्न और मॉनिटरिंग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के बारे में कहा कि कचरे का स्रोत पर पृथक्करण, घर-घर संग्रहण, परिवहन और निस्तारण अत्यंत आवश्यक है। कम्पोस्टिंग, रीसाइक्लिंग, ट्रांसफर स्टेशन और वैज्ञानिक लैंडफिल जैसी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना जरूरी है। प्रशिक्षक अंकुश ने बताया कि एस्पिरेशनल टॉयलेट निर्माण, सेप्टिक टैंक की सफाई, स्लज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, वाहन खरीद, कम्पोस्ट प्लांट और एमआरएफ सेंटर के निर्माण जैसे कार्यों में फंड का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जागरूकता कार्यक्रमों, प्रशिक्षण सत्रों और प्रचार-प्रसार गतिविधियों पर भी राशि खर्च की जा सकती है।
प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं, जनसहभागिता भी अनिवार्य :
प्रशिक्षक राजेश मलिक, सुमति भास्कर ने तालाबों, झीलों और अन्य जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाने, सफाई और सुंदरीकरण पर ध्यान केंद्रित करने की बात की। उन्होंने कहा स्वच्छता के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं,जनसहभागिता भी अनिवार्य है। जागरूकता रैलियां, कार्यशालाएं, दीवार लेखन, पोस्टर और वॉल पेंटिंग के माध्यम से जनजागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया।
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नई पहल के तहत सार्वजनिक शौचालय एवं यूरिनल के रखरखाव का कार्य संस्थाओं, मार्केट एसोसिएशन, आरडब्ल्यूए और धार्मिक संगठनों को सौंपा है। प्रति शौचालय सीट 100 रुपये और प्रति यूरिनल पॉट 50 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किया जा रहा है। किसी टॉयलेट कॉम्प्लेक्स के लिए अधिकतम 15,000 रुपये प्रतिमाह तक की राशि प्रदान की जा सकती है। -नीरज, निगमायुक्त
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ऐसे मिलेंगे स्वच्छता के अंक
1. दृश्यमान स्वच्छता -1500
2. कचरा पृथक्करण, एकत्रीकरण व परिवहन- 1000
3. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन -1500
4. स्वच्छता तक पहुंच -1000
5. प्रयुक्त जल प्रबंधन -1000
6. गाद निकालने की सेवाओं का मशीनीकरण- 500
7. स्वच्छता की वकालत -1500
8. पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ीकरण और संस्थागत मापदंड -1000
9. सफाई कर्मचारियों का समग्र कल्याण -500
10. नागरिक प्रतिक्रिया और शिकायत निवारण- 1000
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