अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
वार्ड नंबर 15 के लोग वार्डबंदी को लेकर निगम की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। इस वार्ड के लोगों ने अब अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला लिया है। निगम प्रशासन की ओर से नई वार्डबंदी की फाइनल रिपोर्ट तैयार कर चंडीगढ़ स्थित शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मुख्यालय भेज दी गई है। वार्डबंदी में वार्डवासियों की आपत्तियों को खारिज करने का आरोप लगाया गया है। ऐसे में वार्डवासियों का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि चंडीगढ़ में भी उनके साथ न्याय होगा। इसलिए उन्होंने अदालत जाने की तैयारी शुरु कर दी है।
भाजपा और अधिकारियों पर मिलीभगत के लगाए आरोप
वार्ड निवासियों ने भारतीय जनता पार्टी व निगम अधिकारियों पर वार्ड नंबर 15 में आरक्षित वर्ग के एक नेता को लाभ दिलाने के लिए मिलीभगत करने का आरोप लगाया है। वार्डवासियों के अनुसार सबसे अधिक आपत्तियां वार्ड 15 को लेकर आई है। दूसरी बार में भी 20 वार्डों के लिए 110 आपत्तियां आई थीं, इनमें से 94 अकेले वार्ड नंबर 15 की थीं। आरोप है कि 90 से अधिक लोगों की आपत्तियों को दरकिनार कर एक-दो व्यक्तियों की आपत्तियों पर ही ध्यान दिया गया है।
क्या प्रशासन को बीआई चला रहा
वार्ड 15 को लेकर आपत्ति दर्ज करवाने वाले राकेश पंडित का कहना है कि जब भी वे वार्डबंदी के मामले को लेकर ज्वाइंट कमिश्नर या उपायुक्त से मिलते हैं तो उन्हें सीधा निगम के बिल्डिंग इंस्पेक्टर के पास जाने को कहा जाता है। क्या प्रशासन को बीआई चला रहा है। अधिकारी जान-बूझकर वार्डबंदी संबंधी लोगों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर रहे हैं। राकेश पंडित ने कहा कि अब अगर चंडीगढ़ में भी वार्डबंदी सही नहीं हुई तो अदालत में जाना तय है।
सर्वे में भी गड़बड़ी के आरोप
राकेश पंडित ने आरोप लगाया कि नई वार्डबंदी के लिए निगम द्वारा सर्वे करवाया गया। सर्वे करने की एवज में प्रति घर के हिसाब से 19 रुपये 20 पैसे का भुगतान किया गया, लेकिन सर्वे रेंडमली करके खानापूर्ति की गई। जनता द्वारा संघर्ष करने के बाद वार्डबंदी में सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन वहां भी मिलीभगत कर ली गई।
सीएम विंडो की शिकायत भी निपटा दी
राकेश पंडित ने बताया कि उन्होंने वार्डबंदी के सर्वे में बरती गई अनियमितताओं को लेकर सीएम विंडो पर शिकायत दी थी, लेकिन सीएम विंडो की निगरानी कमेटी में शामिल भाजपा नेताओं ने वहां भी गड़बड़ी करके शिकायत निपटा दी। उन्होंने बताया कि सीएम सेल में भेजी गई रिपोर्ट में उन्हें संतुष्ट दर्शा दिया गया, जबकि इसकी उन्हें भनक तक नहीं थी।