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पुलिस ने नहीं टूटने दी दांप्तय की डोर

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अमर उजाला ब्यूूरो
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हिसार।
पुलिस की छवि जहां आम आदमी के जेहन में कुछ और है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस ऐसा काम भी करती है, जिससे समाज का भला होता है। महिला थाना पुलिस के क्राइम अगेंस्ट वूमेन सेल के सकारात्मक प्रयास से इस साल 1112 परिवार उजड़ने से बच गए। इतना ही नहीं सालभर में आई शिकायतों में से अब केवल 21 पेंडिंग हैं। सेल का मानना है कि 31 दिसंबर तक उनका निपटारा कर दिया जाएगा।
जनवरी से अब तक 1132 शिकायतें आईं
महिला थाना पुलिस के पास साल 2017 में जनवरी से अब तक महिलाओं की 1132 शिकायतें आई। शिकायत आने पर परिवाद थाने के क्राइम अगेंस्ट वूमेन सेल में भेजे गए। सेल में दोनों पक्षों की काउंसिलिंग कराई गई और उनको एक-दूसरे को समझने का मौका दिया। सेल ने काउंसिलिंग कराकर मामले का नुक्स चिह्नित किया। पुलिस ने दोनों तरफ के लोगों से उनका अपना-अपना पक्ष जाना। काउंसिलिंग के दौरान दोनों पक्षों की तरफ से लोग आते हैं। पुलिस मामले से जुड़े अहम लोगों का पक्ष जानती है। महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सरोज बाला घरेलू हिंसा संबंधी परिवाद आने पर उसे सेल में स्थानांतरित कर देती हैं। सेल में एसआई शीला देवी समेत सात सदस्य तैनात हैं। टीम के सदस्य शिकायत की समस्या के समाधान बारे प्रयास शुरू कर देते हैं। कुछ फरियादी असंतुष्ट होकर कोर्ट और प्रोटेक्शन ऑफिसर बबीता चौधरी के कार्यालय में चले जाते हैं।
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इस तरह के आते हैं परिवाद
-पति-पत्नी और ससुराल जनों के झगड़े के विवाद ।
-पति के चरित्र पर शक को लेकर को अनबन।
-विवाहिता को दहेज के लिए प्रताड़ित करना।
-पत्नी को मायके वालों द्वारा न भेजना।

काउंसिलिंग से घर बसाने का किया जाता है प्रयास : सरोज
महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सरोज बाला का कहना है कि पति-पत्नी के बीच झगड़े की शिकायत आने पर दोनों की काउंसिलिंग कराई जाती है। फिर समाधान होता है। उनके पास इस साल 1132 शिकायतें आई। इनमें से 1112 का समझौता हो गया है, बाकी के निपटारे के प्रयास जारी हैं। कोई भी प्रताड़ित महिला थाने में शिकायत दे सकती है।
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