अमर उजाला ब्यूरो
बरवाला। आज ही के दिन 1931 में अंग्रेजों के चंगुल से देश को मुक्ति दिलाने और ब्रिटिश राज व्यवस्था बदलने के लिए शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया था। भारत से अंग्रेजी हुकूमत की व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए उस समय युवाओं ने पूरे देश में एक क्रांति ला दी थी, जिसकी बदौलत आगे चल कर अंग्रेजों को भारत आजाद करना पड़ा।
आज के युवाओं को भी बेरोजगारी की जंजीरों से आजादी दिलवाने के लिए आगे आना होगा। यह बात सांसद दुष्यंत चौटाला ने शनिवार को शहर की अनाज मंडी में शहीदी दिवस पर जेजेपी द्वारा आयोजित समारोह में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए कही।
सांसद दुष्यंत ने कहा कि हम सब मिलकर शहीदी दिवस पर यह संकल्प करें कि तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक इस व्यवस्था को न बदल दें। सरकारी रिकॉर्ड में आज भी भगत सिंह को शहीद का दर्जा प्राप्त नहीं है। इस संबंध में उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से मिलकर और भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को सरकारी रिकॉर्ड में शहीद का दर्जा देने की मांग की थी। युवा सांसद ने कहा कि चार साल बीत जाने के बाद भी आज तक भाजपा सरकार द्वारा कुछ नहीं किया गया। उन्होंने मंच से घोषणा की कि सत्ता में आने पर जींद में शहीद भगत सिंह की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा लगाई जाएगी।
ये रहे कार्यक्रम में मौजूद
कार्यक्रम में जेजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सरदार निशान सिंह, विधायक अनूप धानक, पिरथी नंबरदार, शीला भ्याण, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव उमेद लोहान, पूर्व विधायक राम कुमार गौतम, राजेंद्र लितानी, हरफूल खान भट्टी, डॉ. अनंतराम बरवाला, राजमल काजल, जगदीश राय कक्कड़, एडवोकेट मनदीप बिश्नोई, सत्यवान बिचपड़ी, मुनीश गोयल, धीरा जाट, अनिल बालकिया, प्रवीन सैनी आदि उपस्थित रहे।