अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
हरियाणा सरकार की ओर से किसानों की ऑनलाइन पेमेंट के विरोध में अनाज मंडी के आढ़तियों ने सोमवार दोपहर फसल खरीद बंद कर दी। आढ़तियों ने विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी की। अनाजमंडी में गेहूं बेचने आए किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मंडी एसोसिएशन को शाम के समय सीएम की ओर से आश्वासन मिला। मंगलवार को फिर से गेहूं खरीद शुरू होगी।
सरकार की ओर से 28 अप्रैल को निर्देश जारी किया गया। गेहूं बेचने आने वाले किसान की कोई पहचान, जैसे आधार कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, वोटर कार्ड या राशन कार्ड आदि देखकर ही अनाज खरीदा जाएगा। गेहूं का भुगतान सीधे किसान के खातों में आरटीजीएस के माध्यम से करवाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी बीसीपीए किसान के हरियाणा निवासी होने की पहचान सुनिश्चित करते हुए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 1735 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से उसके बैंक खाते में भुगतान करवाएंगे। आढ़तियों ने इसका विरोध करते हुए हड़ताल कर दी। दोपहर करीब तीन बजे तक खरीद नहीं हो सकी। आढ़तियों ने कहा जब किसान आढ़तियों को फसल बेचते हैं तो पेमेंट किसानों के खाते में क्यों होगी, पेमेंट भी आढ़तियों के खातों में ही होनी चाहिए। अगर सरकार किसान के खातों में ऑनलाइन पेमेंट कर रही है तो किसान की फसल भी सरकार को ही खरीदनी चाहिए।
ये बोले आढ़ती
किसान-आढ़ती एक दूसरे के लंगोटिए मित्र होते हैं। सरकार के इस नियम से किसान और आढ़ती दोनों को परेशानी बढ़ी है। किसान आढ़ती से किसी भी समय एडवांस रुपये ले लेता है। किसान आढ़ती को फसल बेचता है तो रुपये भी आढ़ती से ही लेगा। सरकार के इस नियम से समस्त व्यापारियों में सरकार के प्रति रोष है।
-जगदीश गोदारा, आढ़ती
समस्त व्यापारी इस नियम विरोध में हैं। सरकार से मांग है कि अनाज मंडी में फसल खरीद और रुपये भुगतान के पुराने नियम को ही लागू करें। ऑनलाइन पेमेंट नियम के विरोध में सोमवार को आढ़तियों ने गेेेहूं की खरीद बंद की है। -नरेश सिंघल
कच्चा आढ़ती मंडी एसोसिएशन के जिला प्रधान पवन गर्ग ने बताया कि सरकार जल्द से इस नियम को वापस लें। ऑनलाइन पेमेंट नियम से किसान और आढ़ती दोनों को ही नुकसान है। - पवन गर्ग
अनाज मंडी एसोसिएशन स्टेट के पदाधिकारियों के नुमाइंदे की मुख्यमंत्री मनोहर लाल से बात हो गई है। मुख्यमंत्री ने व्यापारियों की मांग को जायज ठहराते हुए पुराने नियम को लागू करने का आश्वासन दिया है। जल्द ही खरीद शुरू हो जाएगी।
-संजय गोयल, प्रधान अनाज मंडी एसोसिएशन हिसार
क्यों लिया था फैसला
दूसरे प्रदेशों के किसान हरियाणा में गेहूं न बेचे, इसके लिए सभी एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए थे। इसमें कहा कि अनाज मंडी और खरीद केंद्रों पर केवल हरियाणा के किसानों की ही गेहूं खरीदा जाए। गेहूं का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से सीधा किसान के खाते में भिजवाया जाए। गेहूं बेचने आने वाले किसान की कोई पहचान, जैसे आधार कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, वोटर कार्ड या राशन कार्ड आदि देखकर ही अनाज खरीदा जाए।
अब तक हुई 5.15 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद
जिले के किसानों से अब तक विभिन्न खरीद एजेंसियों के माध्यम से 5 लाख 15 हजार 61 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी जा चुकी है। खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से 181412 मीट्रिक टन, हैफेड ने 229744 मीट्रिक टन, हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन ने 70133 मीट्रिक टन और एफसीआई ने 33772 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा।
52816 किसानों से गेहूं खरीदा
जिले में अब तक 52816 किसानों की गेहूं खरीदा गया है। इसमें से 59 प्रतिशत किसानों को उनकी गेहूं का भुगतान करवाया जा चुका है। वेयर हाउसिंग कारपोरेशन द्वारा सर्वाधिक 90 प्रतिशत। खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर सेे 70 प्रतिशत किसानों को भुगतान किया गया है। कुल खरीदे गए गेहूं का 57 प्रतिशत उठान करवाया जा चुका है।
सरकार की फूट डालने की साजिश नाकाम
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने कहा सरकार ने गेहूं का भुगतान मंडी के आढ़तियों के माध्यम से ही करने का निर्णय लिया है। यह प्रदेश के व्यापारियों की एकता की सफलता है। बजरंग दास गर्ग ने कहा कि सरकार की ओर से बार बार तुगलकी फरमान जारी करने से प्रदेश का व्यापार खत्म होता जा रहा है। सरकार मंडियों से आढ़तियों का व्यापार खत्म करने पर तुली हुई है। किसान-व्यापारियों में भाईचारा खराब करने की नाकाम कोशिश में सरकार लगी हुई है, जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गेहूं का भुगतान सीधे किसानों के खाते में करने का फैसला 11 जिलों की मंडियों में ही लागू किया था। इसमें मंडी के आढ़तियों में भी फूट डालने की साजिश थी।