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Hisar News: खाद पर निगरानी के लिए बनाईं 11 समितियां

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हिसार। प्रदेश में खाद की बढ़ती किल्लत के बाद कृषि विभाग ने अहम निर्णय लिया है। अब खाद की आपूर्ति और वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। कृषि कल्याण विभाग ने 20 बैग से अधिक खाद खरीदने वाले किसानों की पहचान करने का निर्णय लिया है। ऐसे किसानों का सत्यापन किया जाएगा, जिसमें विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर जांच करेंगे कि किसान ने कितने एकड़ में फसल की बिजाई की है।
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इसके अतिरिक्त, कृषि विभाग के अधिकारियों ने डीएपी (डीमोनियम फॉस्फेट) की कालाबाजारी और जमा खोरी को रोकने के लिए पुलिस से जिला स्तर पर नाके लगाने का अनुरोध किया है। विभाग ने इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए कुल 11 अलग-अलग समितियों का गठन किया है, जिनमें कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ पुलिस के कर्मी भी शामिल किए गए हैं। समितियों के नाके पहले से तय किए गए हैं और आगामी आदेशों तक ये नाके प्रभावी रहेंगे।
इन्हें साैंपी जिम्मेदारी : शहरी क्षेत्र में कृषि विभाग की अधिकारी डॉ. प्रिया संवाल व डीएसपी संजीव कुमार की अध्यक्षता में बनी कमेटी खाद की शिकायतों पर उड़नदस्ते के रूप में काम करेगी। अग्रोहा क्षेत्र में डॉ. प्रिया संवाल व डीएसपी किशोरीलाल की टीम छापे मारेगी। ग्रामीण क्षेत्र के लिए सहायक पौध संरक्षण अधिकारी डॉ. अरुण कुमार और डीएसपी संजीव कुमार की टीम कार्य करेगी। बरवाला क्षेत्र में डॉ. अरुण यादव और डीएसपी सुमित कुमार की टीम निरीक्षण करेगी। आदमपुर क्षेत्र में उपमंडल अधिकारी कृषि अजीत सिंह तथा डीएसपी किशोरीलाल की टीम खाद की आपूर्ति की निगरानी करेगी। उकलाना क्षेत्र में डॉ. महीपाल और डीएसपी सुमिति कुमार की टीम काम करेगी, जबकि हांसी क्षेत्र के लिए डॉ. प्रीति और डीएसपी सिद्धार्थ की टीम निरीक्षण करेगी। बास क्षेत्र में कृषि विभाग के रविंद्र कुमार और डीएसपी रविंद्र सांगवान की टीम कार्य करेगी, और नारनौंद क्षेत्र में डॉ. आरती व डीएसपी रविंद्र सांगवान की टीम खाद की आपूर्ति पर नजर रखेगी।
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भादरा रोड पर अंतरराज्यीय नाके के लिए डॉ. अरुण कुमार, ईएसआई भूप सिंह और अजीत सिंह, ईएचसी अनिल कुमार की टीम मोड़ा खेड़ा के पास नाके की निगरानी करेगी। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार इन टीमों का गठन किया गया है। यदि किसानों या आम जनता को खाद को लेकर किसी भी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़े, तो वे विभाग से शिकायत कर सकते हैं।
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