हिसार। करीब 10 वर्ष के इंतजार के बाद सातरोड कलां के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का नया भवन मिल गया है। गांव की चौपाल में संचालित हो रही पीएचसी को नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया है और यहां ओपीडी सेवाएं भी शुरू हो गई हैं। हालांकि पीएचसी की 33 मरले जमीन पर कब्जा होने के कारण चहारदीवारी का निर्माण कार्य अभी अधूरा है।
सातरोड कलां का पुराना पीएचसी भवन वर्ष 2016 में कंडम घोषित कर दिया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य केंद्र को गांव की चौपाल में स्थानांतरित कर दिया गया था। पिछले 10 वर्षों से चौपाल में संचालित हो रही पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं सीमित संसाधनों के बीच दी जा रही थीं। इसके समाधान के लिए ग्राम पंचायत ने स्वास्थ्य विभाग को करीब 4.5 एकड़ भूमि उपलब्ध करवाई, जिस पर 5.5 करोड़ रुपये की लागत से नया भवन तैयार किया गया।
हालांकि भवन तैयार होने के बावजूद परिसर की 33 मरले भूमि पर कब्जा होने के कारण चहारदीवारी का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी को नए भवन में स्थानांतरित कर यहां मरीजों के लिए सेवाएं शुरू कर दी हैं।
गंदे नाले के किनारे करवाई गई फेंसिंग
पीएचसी परिसर से होकर एक गंदा नाला गुजरता है। किसी प्रकार की दुर्घटना से बचाव के लिए लोक निर्माण विभाग (बीएंडआर) की ओर से नाले के किनारे फेंसिंग करवाई गई है ताकि मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कब्जे हटाने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने की मांग
स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी की भूमि से कब्जा हटवाने के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने का अनुरोध किया है। विभाग का कहना है कि प्रशासनिक सहयोग मिलने के बाद कब्जे हटाकर चहारदीवारी का निर्माण कार्य पूरा कराया जा सकेगा। फिलहाल इस संबंध में ड्यूटी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति नहीं हुई है।
7 गांवों की 50 हजार से अधिक आबादी को मिलेगा लाभ
सातरोड कलां स्थित यह पीएचसी सात गांवों की 50 हजार से अधिक आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराता है। इसके अंतर्गत लाडवा, खरड़-अलीपुर, मय्यड़, छोटी सातरोड, बड़ी सातरोड, भगाना तथा सातरोड कलां गांव आते हैं। केंद्र में प्रतिदिन 70 से अधिक मरीज ओपीडी सेवाओं का लाभ लेते हैं।
नए भवन में पीएचसी को शिफ्ट कर दिया गया है। भूमि से कब्जा हटाने के लिए जिला प्रशासन से ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने की मांग की गई है।
- डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन।