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10 प्रतिशत लोग 60 प्रतिशत संसाधनों पर काबिज : शीतल पी सिंह

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जाट कॉलेज हिसार में जातिवाद और सांप्रदायिकता विषय पर आयोजित सेमिनार में बोलते वक्ता।
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हिसार। सद्भावना मंच की ओर से शनिवार को स्थानीय जाट धर्मशाला परिसर में जातिवाद और सांप्रदायिकता विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक शीतल पी सिंह मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने देश में तेजी से बढ़ रही आर्थिक असमानता और तमाम संसाधनों पर मुट्ठीभर पूंजीपतियों के आधिपत्य पर चिंता जताई।
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सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 की रिपोर्ट के अनुसार देश के 10 फीसद लोग 60 फीसद संसाधनों पर काबिज हैं। 50 फीसद लोगों की आय पिछले 15 साल से स्थिर बनी है। उन्होंने कहा कि फिक्की की रिपोर्ट के अनुसार देश के सौ करोड़ लोगों के पास क्रय शक्ति नहीं बची।

आदिवासी जनसंख्या का बड़ा हिस्सा मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। इस कारण उनका सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्तर बेहद कमजोर है। वह समाज की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं।
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पूर्व आईएएस अशोक गर्ग ने कहा कि देश में संविधान लागू होने के 75 साल बाद भी देश जातीय और सांप्रदायिकता के चंगुल में फंसा है। यही देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों की स्थिति भी बदतर है। सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक समानता लाकर उनके हालात को सुधार सकते हैं। तेजी से बढ़ती आर्थिक असमानता देश के लिए बड़ी गंभीर चुनौती और चिंता का विषय है।

गर्ग ने कहा कि आजादी के 77 साल बाद भी हमारा देश जात, धर्म, क्षेत्रवाद जैसी संकीर्णता की बेड़ियों में जकड़ा है। जो देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। आपसी सौहार्द, एकता और सांप्रदायिक समन्वय से आर्थिक, सामाजिक और तमाम चुनौतियों से निपटा जा सकता है।

सेमिनार में पहुंचे एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल, विक्रम मित्तल, शमशेर सिंह नंबरदार, सलाउद्दीन कागदाना, अशोक सैनी, सुरेंद्र यादव, नूर मोहम्मद और डेविड विक्टर ने आमंत्रित वक्ताओं से सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, लोकतांत्रिक और सांविधानिक मुद्दों पर सवाल-जवाब किए।

इस दौरान सद्भावना मंच के प्रधान ओमप्रकाश सैनी, संस्थापक बनवारीलाल बिश्नोई, सिख समाज से कृष्ण पाली, होशियार खान, बबली लांबा, हमारा प्यार हिसार के सुशील खरींटा, राकेश अग्रवाल, सत्येंद्र यदुवंशी, डॉ. रमेश पूनिया आदि मौजूद रहे।
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