हरियाणा में भाषा अध्यापक का कोर्स करने वाले अब हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एचटेट) नहीं दे सकेंगे।
इन कोर्स धारकों ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल से गुहार लगाई है कि उनको एचटेट के लिए योग्य बनाया जाए।
बेरोजगार ओटी प्रशिक्षित अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश शास्त्री और अन्य का कहना है कि ओटी (हिंदी, संस्कृत, पंजाबी) भाषा अध्यापकों के लिए एक विशेष कोर्स है।
प्रदेश सरकार ने 1995 से 2002 तक भाषा अध्यापक कोर्स करवाया।
करीब डेढ़ सौ उम्मीदवारों को मेरिट के आधार पर चुना जाता था। दाखिले से पहले फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी था।
यह कोर्स करने वाले अधिकतर शिक्षक भर्ती हो गए मगर अभी भी 1500 बेरोजगार हैं। सरकार ने नियम बदल दिए तो इनकी भर्ती बंद हो गई।
इस समय स्कूलों में गेस्ट टीचर के तौर पर करीब 1700 भाषा अध्यापक कार्यरत हैं। मगर नियम के कारण एचटेट में नहीं बैठ सकते। नतीजतन वे पात्रता परीक्षा प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में भाषा अध्यापक के जितने पद गेस्ट टीचर हैं उतने ही बेरोजगार हैं इसलिए उन्हें वहीं पर स्थायी नियुक्ति दी जाए।
उन्होंने बताया कि इस कोर्स के बाद उन्हें माध्यमिक शिक्षा विभाग एससीईआरटी के माध्यम से डाइटों में प्रशिक्षण दिया जाता था।
इन डिप्लोमा धारकों को भाषा अध्यापकों की भर्ती में नियुक्त किया जाता रहा है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ ने यह कोर्स करने वालों को एडजस्ट कर दिया मगर हरियाणा में करीब डेढ़ हजार बचे हैं।
निगम बदलने के कारण पैसे खर्च करने के बाद उनका किया कोर्स भी बेकार हो जाएगा और उनकी उम्र भी बढ़ रही है।