करनाल के गांव कंबोपुरा के पूर्व सरपंच कर्म सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी हरियाणा के पूर्व मंत्री ओपी जैन की जमानत अर्जी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एमएस सुल्लर की एकल बेंच ने वीरवार को मंजूर कर ली। इस मामले में जैन कई महीनों से जेल में हैं।
हरियाणा पुलिस द्वारा जैन और जिले राम शर्मा को क्लीन चिट देने के विरोध में सीबीआई जांच की मांग लेकर कर्म सिंह के परिजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने जांच के बाद चार अक्तूबर 2012 को मामला दर्ज किया गया और अब पंचकूला की सीबीआई अदालत में दोष पत्र भी दाखिल कर दिया गया है।
जैन के वकील एडवोकेट आरएस चीमा ने जिरह के दौरान कहा कि जैन नरम स्वभाव के हैं और वह किसी को आत्महत्या के लिए नहीं उकसा सकते। पैसे का लेन-देन हो सकता है, इसका यह मतलब नहीं है कि जैन ने कर्म सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाया।
सीबीआई के वकील एडवोकेट सुखदीप सिंह संधु ने जिरह करते हुए कहा कि कई गवाहों ने बयान दिया है कि मौत से पहले कर्म सिंह ने बताया था कि नौकरी के लिए लोगों से जो पैसे लेकर जैन को दिए थे, वह जैन नहीं लौटा रहा इसलिए वह काफी परेशान है।
दूसरी दलील दी गई कि मामले में दोष पत्र दाखिल हो चुका है और अब मामला अहम दौर पर है, गवाहियां होनी हैं। चूंकि पहले भी गवाहों को प्रभावित करने के आरोप और मामले सामने आ चुके हैं, ऐसे में यदि जैन को जमानत मिलती है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी कई मिसाल सामने आ चुकी हैं कि मंत्री पैसे लेते होंगे, लेकिन इस मामले में ऐसा कोई सबूत सीबीआई और कर्म सिंह के परिजन पेश नहीं कर पाए हैं, जिससे साबित हो सके कि जैन ने कर्म सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाया हो। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जैन की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।