हरियाणा सरकार और सीनियर आईएएस अशोक खेमका का स्कोर बराबर है। दोनों एक-दूसरे के खिलाफ मामले बनाने में लगे हैं।
दोनों ने अब तक 6-6 मामले बना दिए हैं। यह अलग बात है कि अब तक न सरकार का कुछ बिगड़ा है और न खेमका का।
हरियाणा सरकार ने एक चार्जशीट खेमका को थमा दी है तो दूसरी चार्जशीट तैयार की जा रही है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार में खेमका को वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के एमडी, कृषि विभाग के निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता के महानिदेशक, हरट्रॉन के एमडी जैसे पदों पर तैनात किया था।
मगर खेमका और सरकार के बीच ऐसी तल्खी बढ़ी कि एक साल के भीतर खेमका ने सरकार और अफसरों के खिलाफ छह मामले बना दिए।
सरकार ने भी पलटवार कर खेमका के खिलाफ छह मामले बना दिए।
खेमका ने ये बनाए मामले
1. वाड्रा-डीएलएफ डील में जमीन का म्युटेशन रद्द किया : खेमका ने 15 अक्तूबर, 2012 को म्युटेशन रद्द किया तो यह देश-विदेश की बड़ी खबर बनी। हरियाणा सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
2. साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का घोटाला : खेमका ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा कि सीएलयू के नाम पर प्रदेश में 3,50,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। इससे विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिला।
3. सीबीआई को शिकायत भेजी, प्रारंभिक जांच जारी : खेमका ने हरियाणा बीज विकास निगम के एमडी पद पर रहते हुए 4 मार्च, 2013 को सीबीआई के चंडीगढ़ डीआईजी को शिकायत भेजकर आरोप लगाया कि गेहूं बीज खरीद में घोटाला हुआ है और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का पांच करोड़ रुपये की राशि का सब्सिडी के नाम पर दुरुपयोग हुआ है। सीबीआई ने इस मामले में प्रारंभिक जांच दर्ज कर ली है। जांच जारी है।
4. ग्वार के बीज खरीद में पांच करोड़ रुपये का घोटाला बताया : खेमका ने कुछ दिन पहले मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा कि 2012-13 में ग्वार का बीज कृषि विभाग ने मार्केट रेट से पांच गुना महंगा खरीदा। इसे किसानों में मुफ्त बांटने के लिए नाम खरीदा गया और पांच करोड़ रुपये की सब्सिडी का घोटाला हुआ।
5. बेकार में खरीद ली पैंसठ करोड़ रुपये की दवा : बीज विकास निगम के एमडी रहते हुए खेमका ने बीज उपचारित करने के लिए करनाल बंट बीमारी के नाम पर खरीदी जा रही रैक्सिल दवा पर सवाल उठाए। खेमका ने कहा कि केंद्र सरकार और निर्माता कंपनी ने इस दवा को करनाल बंट बीमारी के लिए तैयार नहीं किया। इस तरह पांच साल में 65,00,00,000 करोड़ रुपये बेकार में खर्च कर दिए।
6. बैंक से कर्ज कृषि के नाम पर लिया, फिक्स डिपाजिट में डाल दिया : खेमका ने केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर को पिछले सप्ताह पत्र लिखकर कहा कि हरियाणा बीज विकास निगम ने आईसीआईसीआई से कृषि के नाम पर कर्ज लिया मगर उसे फिक्स डिपाजिट में जमा कर करीब छह लाख रुपये का मुनाफा कमाया। यह नियमानुसार गलत था।
हरियाणा सरकार ने खेमका के खिलाफ ये बनाए मामले
1. म्युटेशन रदद् करने में चार्जशीट सौंपी : हरियाणा सरकार ने वाड्रा-डीएलएफ डील में म्युटेशन रद्द करने के मामले में कड़े दंड के नियमों में खेमका को चार्जशीट सौंप दी है। इसमें अधिकतम सजा नौकरी से बर्खास्तगी है।
2. गेहूं बीज की कम बिक्री : हरियाणा सरकार ने खेमका को बीज विकास निगम में एमडी रहते हुए 87,000 क्विंटल गेहूं बीज की कम बिक्री का आरोपी माना है। मुख्यमंत्री ने इस मामले में खेमका को चार्जशीट करने की मंजूरी दी है। मुख्य सचिव दफ्तर में चार्जशीट तैयार हो रही है। कानूनी लेने के बाद मुख्यमंत्री से मंजूरी लेकर खेमका को चार्जशीट सौंपी जाएगी।
3. मूंग दाल का बीज खरीद में विजिलेंस जांच : बीज विकास निगम के एमडी पद पर रहते हुए खेमका ने मूंग दाल का बीज सरकारी एजेंसियों से खरीदने के बजाय एक प्राइवेट एजेंसी से खरीदा। तीन हजार क्विंटल का टेंडर देकर दस हजार क्विंटल बीज खरीद लिया। सरकार ने इस मामले में खेमका के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस जांच जारी है।
4. कीटनाशनक दवा महंगी खरीदने, गेहूं बीज समय पर न पहुंचाने की विजिलेंस जांच : एक किसान सतपाल कौशिक की शिकायत पर खेमका के बीज निगम के एमडी कार्यकाल में कीटनाशक दवा महंगी खरीदने और सीड विलेज स्कीम के तहत किसानों को गेहूं बीज न देने के मामले की विजिलेंस जांच के आदेश सरकार ने दे रखे हैं। जांच जारी है।
5. गोदामों के निर्माण का ठेका एक कंपनी को देने का मामला : वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के एमडी पद पर रहते हुए विदेशी गैलवैल्यूम शीटों वाले गोदाम बनाने का ठेका एक कंपनी को देने में अनियमितताओं की जांच के लिए सरकार ने प्रधान महालेखाकर को पत्र लिखकर विशेष ऑडिट करने का आग्रह किया है। अभी विशेष ऑडिट शुरू नहीं हुआ है।
6. गैलवैल्यूम शीट गोदाम निर्माण की विजिलेंस जांच : कृषि विभाग ने हरियाणा सरकार को सिफारिश की है कि गैलवैल्यूम शीट वाले गोदाम निर्माण का ठेका देने में आर्थिक अपराध शामिल है। इसलिए इस मामले की विजिलेंस जांच करवाई जाए। मुख्य सचिव कार्यालय में यह सिफारिश 20 दिन से लंबित है। सरकार ने अब तक फैसला नहीं किया है मगर उम्मीद है कि सरकार सिफारिश मानेगी।