राजस्थान सीमा से लगते हरियाणा के गांवों में सामाजिक तानाबाना बिगड़ने का यह भी बड़ा कारण है। अब इस क्षेत्र में नई नहरें बनने लगी हैं, जिससे हालात बदलने की उम्मीद है। राम सिंह व बलवंत उम्मीद तो करते हैं कि नहरों में पानी आएगा, लेकिन कब और कितना, इसे लेकर इंतजार करने के अलावा उनके पास कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार नई माइनर पर पैसा तो खूब खर्च कर रही है, लेकिन पानी भी उतना ही आए तो बात बनेगी।
अविवाहित मयंक ने बताया कि नहरी पानी न मिलने से कुछ गांवों में फसल नहीं होती, बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। जमीन सूखी पड़ी है। उनके गांव झुंपा कलां में छह महीने से हालात बेहतर हुए हैं। सर्दियों में पानी की दिक्कत नहीं हुई। गर्मियों में भी ऐसा ही रहा तो अच्छी फसल होगी। उनकी सरकार से यही विनती है कि बॉर्डर के सभी गांवों में नई माइनर बनाकर अंतिम टेल तक पानी पहुंचाएं ताकि बेरोजगार युवा खेती कर आर्थिक तौर पर संपन्न हो सकें और उनकी शादी हो सके।
कई परिवारों में पूर्वोत्तर से आई बहुएं
भिवानी जिले में सामाजिक तानाबाना काफी पहले से बिगड़ा हुआ है। यहां के कई परिवारों ने अपने बेटों की शादी पूर्वोत्तर के राज्यों में करनी पड़ी है। यह भी इतना आसान नहीं। पूर्वोत्तर की लड़कियां भी यहां ब्याह तभी करने को राजी होती हैं, जब पहले से यहां रची-बसी पूर्वोत्तर की कोई विवाहिता उनकी जान पहचान या आस पड़ोस की होती है। अनजान व्यक्ति के साथ शादी करने को कोई लड़की तैयार नहीं।
प्याज का व्यापार खूब आ रहा रास
सीमांत गांवों के युवा व अधेड़ भिवानी व आसपास के जिलों में प्याज का खूब व्यापार करते हैं। वे सस्ते में राजस्थान से प्याज लाकर यहां बेच रहे। सस्ता प्याज लाकर वे कुछ दिन रखते हैं और उसके बाद फेरी लगाकर अच्छे दाम पर बेच देते हैं, जिससे उनका गुजारा चल जाता है।
मैं क्षेत्र की दिक्कतों से परिचित हूं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों से समय-समय पर नई नहरों के निर्माण व पानी आपूर्ति की रिपोर्ट ली जा रही है। आने वाले दिनों में हालात में काफी सुधार आएगा। - मनेाहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा