गोहाना रैली में मुख्यमंत्री की ओर से सरकारी अस्पतालों में फ्री इलाज की घोषणा कहीं मुसीबत न बन जाए। इससे कम संसाधन वाले मरीजों की भीड़ को संभावना मुश्किल हो जाएगा।
संसाधन की कमी ने सिविल अस्पताल में इलाज को बेहद परेशानी भरा बना रखा है। यहां केवल एक ही फिजिशियन है। इसके चलते सर्दी, जुकाम और वायरल जैसी बीमारियों के उपचार के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ता है।
आठ महीने से रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत केवल गर्भवती महिलाओं के ही अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। सामान्य मरीजों को महंगे दाम पर बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। सीटी स्कैन की सुविधा भी अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। हालांकि एमआरआई है, लेकिन इसकी वेटिंग एक माह तक पहुंच जाती है। इसके अलावा भी तमाम ऐसी परेशानियां हैं, जो ओपीडी बढ़ने के साथ ही बढ़ जाएंगी।
सामान्य अस्पताल में पूरी तरह से फ्री इलाज मरीजों के लिए बेहतर कदम होगा। वर्तमान में भी गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों को मुफ्त इलाज मिल रहा है। चिकित्सकों की नियुक्ति और संसाधन की व्यवस्था प्रक्रिया में है। -डॉ. मनीष राठी, वरिष्ठ प्रबंधन अधिकारी, सामान्य अस्पताल