गुड़गांव। फूड बिजनेस ऑपरेटर लाइसेंस नहीं लेने की वजह से शहर के सैकड़ों रेस्टोरेंट, स्कूल कैंटीन और कैफेटेरिया पर ताले लटक सकते हैं। लाइसेंस लेने के लिए चार फरवरी आखिरी दिन है, लेकिन विडंबना यह है कि इस कारोबार से जुड़े अधिकांश लोगों को इस बारे में जानकारी तक नहीं है।
शहर में रेस्टोरेंट उद्योग का एक हजार से अधिक का कारोबार है। इसके लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया से फूड बिजनेस ऑपरेटर लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यह लाइसेंस बड़े होटलों, रेस्टोरेंट चेन, स्कूल कॉलेज की कैंटीन और कॉरपोरेट सेक्टर के कैफेटेरिया सभी को लेना होगा। मगर हैरानी की बात यह है कि अथॉरिटी के इस फरमान से कोई वाकिफ नहीं है।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया चार फरवरी के बाद कैंटीन और रेस्टोरेंट का औचक निरीक्षण करेगी। जिनके पास लाइसेंस नहीं होगा, उन जुर्माना लगाया जाएगा। कुछ मामलों में तो उस पर ताला भी लगाया जा सकता है। शहर में करीब 15 सौ रेस्टोरेंट हैं। कॉलेजों और स्कूलों में कैंटीन की संख्या करीब 110 है। कॉरपोरेट कंपनियों की कैफेटेरिया की संख्या भी 450 से अधिक है। इन सभी पर संकट के बादल छा गए हैं।
नहीं है जानकारी
सेक्टर-29 स्थित 21 गन सैल्यूट रेस्टोरेंट के प्रबंध निदेशक मदन मोहन को फूड बिजनेस ऑपरेटर लाइसेंस के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें लाइसेंस के बारे में अथॉरिटी से कोई जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा के लाइसेंस का प्रावधान रेस्टोरेंट संचालकों को परेशान परेशान करने वाला है।
कॉलेज प्रशासन भी अनजान
राजकीय महिला महाविद्यालय सेक्टर-14 कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अशोक दिवाकर ने कहा कि इस प्रकार के लाइसेंस के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी राकेश शर्मा ने बताया कि न ही कैंटीन और न ही कॉलेज के पास इसके बारे में जानकारी है।