गुड़गांव। सिविल अस्पताल में एक जनवरी से लिंक एआरटी सेंटर स्थापित होने जा रहा है। इसके बाद जिले के एड्स रोगियों को दवा लेने के लिए सफदरजंग अस्पताल या एम्स के चक्कर नहीं काटने होंगे। उन्हें एड्स से लड़ने के लिए सिविल अस्पताल में ही तमाम दवाएं उपलब्ध होंगी।
वर्तमान में एड्स रोगियों को दवा लेने के लिए खासी परेशानियां उठानी पड़ती हैं। जब भी किसी नए एड्स रोगी की पहचान होती है तो उसे वेस्टर्न बलोट टेस्ट के लिए रोहतक जाना होता है। प्रदेश में केवल रोहतक जिला ही ऐसा है, जहां एआरटी सेंटर है। वेस्टर्न बलोट टेस्ट में अगर एचआईवी पॉजिटिव घोषित हो जाए तो एड्स रोगी को हर छह माह बाद सीडी 4 जांच करानी होती है। अगर सीडी 4 टेस्ट 350 से कम आता है तो ऐसे एड्स रोगी को दवाएं शुरू करने का सुझाव दिया जाता है। अभी तक जिले में लिंक एआरटी सेंटर नहीं था। इस कारण एड्स रोगियों को दवा लेने के लिए सफदरजंग अस्पताल, एम्स और रोहतक के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। चूंकि अब जिले में भी लिंक एआरटी सेंटर स्थापित करने की मंजूरी मिल गई है, लिहाजा एड्स रोगियों की यह परेशानी दूर हो जाएगी।
बड़ी राहत
एड्स रोगियों को नियमों के हिसाब से केवल महीने भर की दवा दी जाती है। दवा खत्म होने के बाद दोबारा से तमाम टेस्ट कराने होते हैं। चूंकि सफदरजंग अस्पताल और एम्स पर मरीजों का दबाव अधिक रहता है, इसलिए सभी टेस्ट कराने और उनकी रिपोर्ट हासिल करने के लिए डेढ़ से दो सप्ताह तक चक्कर लगना आम बात है। लिंक एआरटी सेंटर स्थापित होने के बाद इससे मुक्ति मिलेगी।
रजिस्ट्रेशन भी हो जाएगा आसान--
नए एड्स रोगियों को दवा शुरू करने से पहले रजिस्ट्रेशन कराना होता है। चूंकि सफदरजंग और एम्स दोनों ही दिल्ली में है, इसलिए एड्स रोगियों को रजिस्ट्रेशन कराने में खासी परेशानी आती है। सिविल अस्पताल में लिंक एआरटी सेंटर स्थापित होने के बाद महज रिहायशी प्रमाण पत्र देकर रजिस्ट्रेशन हो जाएगा, इसके बाद एड्स रोगी दवा पाने के लिए योग्य हो जाएगा।
कोट
सरकार से मंजूरी मिलने के बाद सिविल अस्पताल में लिंक एआरटी सेंटर स्थापित किया जा रहा है। एक जनवरी से दवा वितरण का काम शुरू हो जाएगा। दवाएं मंगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
डॉ. विजय कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन, एड्स, टीबी व लेप्रोसी