गुड़गांव। सेक्टर तीन-पांच और छह की संयुक्त आरडब्ल्यूए ने कबाड़ का ठेका आवंटित किया है। इस ठेके से आरडब्ल्यूए को जो आमदनी हुई है उसे सेक्टर वासियों के लिए मनोरंजक और दूसरे कार्यक्रमों में खर्च किया जाएगा। आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों की मानें तो सेक्टर में आपसी भाईचारे और मेल-मिलाप के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए लोग एक-दूसरे मिलते हैं और आपस में प्यार बांटते हैं। जाहिर है कार्यक्रमों के लिए धन की आवश्यकता पड़ती है। लोगों की जेब पर बोझ डालने की बजाय सेक्टर से निकलने वाले कबाड़ का ठेका दिया गया है। इसके लिए आरडब्ल्यूए की ओर से बाकायदा बोली लगवाई गई।
आरडब्ल्यूए की प्रधान मीनू सिंह ने बताया कि यह परंपरा पिछली साल से शुरू की गई है। घरों से निकलने वाले कबाड़ से निवासियों के साथ-साथ आरडब्ल्यूए को भी आमदनी हो, इसके लिए यह योजना बनाई गई थी। पिछली बार बोली के जरिए 65 हजार रुपयेकी आमदनी हुई थी। इस बार ठेका तीन लाख एक हजार रुपये में दिया गया है। उन्होंने कहा कि बोली में शहर के कई कबाड़ियों ने हिस्सा लिया। सबसे अधिक बोली लगाने वाले मोहम्मद जावेद को तीन लाख एक हजार रुपये में ठेका दिया गया है। जावेद के सिवाय सेक्टरों का कबाड़ कोई भी लेने नहीं आएगा। उपाध्यक्ष दिनेश वशिष्ठ ने बताया कि साल में तीन-चार बार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसमें त्योहारी कार्यक्रमों से लेकर नव वर्ष का कार्यक्रम शामिल है। इन कार्यक्रमों में सेक्टर वासियों के लिए मनोरंजन की व्यवस्था भी की जाती है। ठेके से होने वाली आमदनी इन कार्यक्रमों पर खर्च की जाती है।
सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहतर
मीनू सिंह ने बताया कि कबाड़ी को ठेका देना सेक्टरों की सुरक्षा की दृष्टि से बेहतर है। दिनभर सेक्टरों में घूमने वाले कबाड़ियों से लोगों को निजात मिल जाती है। ठेके की शर्त में यह साफ किया जाता है कि जो कबाड़ लेने आएगा, उसके पास आरडब्ल्यूए की ओर से जारी किया गया पहचान पत्र होना अनिवार्य है। साथ ही, उनकी पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जाता है। ताकि कबाड़ियों की ओर से किसी प्रकार की आपराधिक वारदात को अंजाम न दिया जा सके। बोली के दौरान महासचिव रवि मेहता, जयभगवान यादव, सूरत यादव आदि पदाधिकारी मौजूद थे।