डाबड़ा में पिछले साल सामूहिक दुराचार का शिकार हुई अनुसूचित जाति की युवती
को मदद की दरकार है। पीड़िता ने कुछ दिन पहले राष्ट्रीय अनुसूचित जाति
आयोग को पत्र लिखकर शिकायत दी थी कि उसे सही तरीके से इलाज नहीं मिल रहा
है।
उस पर हुए जुल्म के बाद सरकार ने वादा किया था कि उसका इलाज
स्तरीय अस्पताल में होगा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलेगी और
उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। पीड़िता ने
आरोप लगाया था कि उसे कॉलेज में भी छात्राओं द्वारा परेशान किया जा रहा है।
इसके बाद पूरा प्रशासन छात्रा को मनाने में जुट गया था।
वहीं,
पीड़िता की मदद को कई संस्थाएं भी आगे आ रही है। एक संस्था का कहना है कि
वे पीड़िता से मिलकर उसकी संभावित मेडिकल और पुनर्वास संबंधी मदद करेगी।
कल से कॉलेज आएगी छात्रा : प्रिंसिपल
राजकीय
महिला महाविद्यालय हिसार के प्राचार्य डॉ. रवि शर्मा ने दावा किया कि
दुराचार पीड़ित छात्रा के साथ कॉलेज में किसी तरह का कोई दुर्व्यवहार नहीं
किया गया। प्राचार्य ने छात्रा द्वारा कॉलेज छोड़ने की बात को भी निराधार
बताया। उन्हाेंने कहा कि वे स्वयं छात्रा के घर पर गए और उसके परिजनों से
मिलकर इस बारे में बातचीत भी की। उसके परिजनों एवं छात्रा ने कॉलेज न
छोड़ने की बात कही है। प्राचार्य ने बताया कि छात्रा के पांव में मोच है और
उसको बुखार आ रहा है। इस वजह से वह कॉलेज नहीं आ रही। शायद वह सोमवार से
कॉलेज आएगी।
सरकारी अस्पताल का इलाज देने का दावा
मुख्य चिकित्सा
अधिकारी डॉ. एसआर सिवाच ने बताया कि पीड़ित छात्रा सामान्य अस्पताल में
इलाज के लिए आती रही है। सामान्य अस्पताल के अतिरिक्त सुखदा अस्पताल और डॉ.
बालकिशन गुप्ता से इलाज चल रहा है। इलाज के लिए डॉक्टरों ने जो दवाई लिखी
वह सामान्य अस्पताल द्वारा छात्रा को नि:शुल्क उपलब्ध करवाई गई है।
यह था मामला
डाबड़ा
गांव में 9 सितंबर 2012 को अनुसूचित जाति की एक किशोरी के साथ गांव के ही
युवकों ने सामूहिक दुराचार किया था। इस सदमे में किशोरी के पिता ने
आत्महत्या कर ली थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मई, 2013 में चार युवकों को
उम्रकैद की सजा सुनाई।