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प्रोड्यूसर नहीं मिले तो दोस्तों ने ऐसे बनाई फिल्म

Fri, 20 Sep 2013 12:16 AM IST
चंडीगढ़/अजय गर्ग
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दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मंजिल खुद ब खुद अपने रास्ते बना लेती है। यह पंक्तियां सच कर दिखाई हैं, हरियाणा और चंडीगढ़ के जोशीले युवाओं की टीम ने।
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मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे इन एक दर्जन से ज्यादा युवाओं ने जब मसाला मूवी की बजाय सार्थक सिनेमा बनाने का निर्णय लिया तो प्रोड्यूसरों ने हाथ खींच लिए। इससे इनके हौसले पस्त नहीं हुए। इन्होंने संघर्ष के दिनों के दौरान की अपनी कमाई और कर्ज लेकर फिल्म की कहानी से समझौता किए बगैर अपना प्रोडक्शन हाउस खोलकर शूटिंग पूरी की। अब फिल्म को रिलीज का इंतजार है, जिससे इन युवाओं को काफी उम्मीदें हैं।

ऐसे बना प्रोडक्शन हाउस
जींद निवासी डायरेक्टर और राइटर अभिषेक भोला ने बताया कि प्रोड्यूसर केवल उसी फिल्म में पैसा लगाते हैं, जो मसाला मिक्स हो। यही वजह है कि गंभीर विषयों पर भी जो फिल्में बन रही हैं, उसे भी बेचने के लिए ‘मसाला’ डाला जाता है। हमने दिल्ली आंदोलन और अनशन के दौरान समसामयिक मुद्दों पर युवाओं के मन में उठ रही हलचल पर मूवी बनाने का प्लान किया।
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कई प्रोड्यूसरों को कहानी पसंद आई, लेकिन सभी यही चाहते थे कि इसमें आइटम नंबर डालें, कुछ भड़काऊ चीजों को परोसें। हमने ऐसा करने से मना कर दिया। तब कुरुक्षेत्र निवासी और को-डायेक्टर केशव मेहता के सुझाव से हमने रवि नारंग उकलाना, बिन्नी जींद, कृष्णा झारखंड और प्रशांत ओडिशा के साथ मिलकर फिल्म को खुद ही प्रोड्यूस करने की सोची। सबने दर्शकों को सार्थक सिनेमा देने के लिए अपनी अब तक की कमाई इसमें लगाई और कुछ लोन लिया।

इसके बाद बनाया गिल्ली-डंडा इंटरटेनमेंटस और केशु फिल्मस, जिसके बैनर तले लगभग 50 लाख रुपये के बजट से बनाई गई पूरी मूवी। इसमें कलाकारों और क्रू मेंबर्स ने भी सहयोग किया। इस बैनर तले आगे भी सार्थक फिल्में बनाई जाती रहेंगी, जिसके लिए निवेशकों की तलाश की जा रही है।
 
पंजाब यूनिवर्सिटी समेत हरियाणा-पंजाब के कलाकार
इस फिल्म में 13 कलाकार हरियाणा से हैं, जिनमें से छह पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट से पास आउट हैं। पीयू से पासआउट अमित चौहान जींद, वीरेंद्र शर्मा कुरुक्षेत्र और यमुनानगर से  उज्जवल, अमर चौधरी, राजेंद्र शर्मा नन्नू और रजत ने शानदार अभिनय किया है। इसके अलावा चोट के डायरेक्टर चरखी दादरी निवासी नभ कुमार, मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर कुरुक्षेत्र के डायरेक्टर विश्वदीप त्रिखा, करनाल के रंगकर्मी संजीव लखनपाल, राम गिरधर भिवानी, देव गौहर रेवाड़ी, मनीषा अंबाला, धीरज मिगलानी सोनीपत, मिलिंद वाघ और मनदीप कौर अमृतसर ने भी अभिनय के साथ-साथ फिल्म बनाने में सहयोग किया है।

अभिषेक का सफर
टीवी सीरियल हम सब बाराती हैं में डायरेक्टर संजय छैल के असिस्टेंट के तौर पर काम किया। कहानी घर-घर की, कसौटी जिंदगी की कामेडी स्पेशल, द ग्रेट इंडियन कामेडी शो, लो कर लो बात में असिस्टेंट डायरेक्टर की भूमिका निभाई। फिल्म जो बोले सो निहाल, मैंने प्यार क्यों किया और पार्टनर में डॉयलाग लिखे।
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‘आजकल फिल्म मेकर्स प्रोडक्ट बनाते हैं, हमने फिल्म बनाई है।’
- अभिषेक भोला, डायरेक्टर

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