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महिला किसान दिवस पर नारी शक्ति का आक्रोश प्रदर्शन

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महिला किसान दिवस पर प्रदर्शन करतीं महिलाएं। - फोटो : Fatehabad
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महिला किसान दिवस के मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा का विरोध प्रदर्शन महिलाओं के हाथ में रहा। किसानों के समर्थन में नारी शक्ति ने आवाज बुलंद की। लघु सचिवालय के सामने चल रहे धरने में पुरुषों की संख्या नाममात्र ही रही। विरोध प्रदर्शन की कमान महिलाओं ने ही संभाली। गांव धारसूल से अध्यापक संघ के जिला सचिव कृष्ण कुमार के परिवार की छह बेटियां एक साथ धरने पर पहुंची। उन्होंने किसानों के समर्थन में नारे लगाते हुए कहा कि अगर किसान कोई मांग कर रहे हैं तो सरकार को बात सुननी चाहिए। धरने पर पहुंची धारसूल की ज्योति, तृप्ति, सोफी, नेहा, नैंसी, पूनम, रत्ताथेह से उनके साथ आई वीरपाल व सहज ने बताया कि वे फिलहाल पढ़ाई कर रही हैं। उन्हें कृषि कानूनों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। मगर किसान परिवारों में जन्मी हैं इसलिए किसानों की परेशानी को उनसे ज्यादा कोई नहीं समझ सकता। उन्होंने अपने बड़े बुजुर्गों को खेतों में संघर्ष करते हुए देखा है। उन्हें पता है कि बाजार में एक किसान को कैसे ठगा जाता है इसलिए वे किसानों के समर्थन में आवाज उठाने आई हैं।
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महिला किसान दिवस के मौके के कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर अलग अलग गांवों से महिलाएं पहुंची। उन्होंने लघु सचिवालय पर इकट्ठे होकर प्रदर्शन किया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन से पहले उपायुक्त कार्यालय पर संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा चल रहे अनशन स्थल पर एक जनसभा का आयोजन किया गया। जनसभा की अध्यक्षता भादो देवी भूथन, कुलवंत कौर भिरड़ाना, श्योनंद धारसूल, महेंद्रों फुलां, माया पीलीमंदोरी, उषा गोरखपुर, मूर्ति जांडली, दर्शन ढाणी ईशर, कृष्णा कालीदास कॉलोनी, बचन कौर झलनिया ने संयुक्त रूप से की।
सभा का संचालन पूर्व जिला पार्षद सुनीता जांडली ने किया। जनसभा को महिला किसान नेत्री परमजीत भूथन कलां, कौशल्या भूथन कलां, जसवंत कौर, डॉ. ऊषा दहिया, वीना सहनाल, प्रोमिला जांडली खुर्द, सहजपाल कौर, कमलेश वशिष्ठ एडवोकेट, पूर्व जिला पार्षद सुमनलता सिवाच आदि महिला किसान नेत्रियों ने संबोधित किया। महिला किसान नेताओं ने जनसभा में कहा कि जब तक केंद्र सरकार खेती विरोधी लागू किए तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती, यह आंदोलन जारी रहेगा और इस आंदोलन में महिलाएं भी भागीदारी करती रहेंगी।
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