तंबाकू का सेवन सेहत के लिए जानलेवा है, इसको जानते हुए लोग इसके आदी हो रहे हैं। कैंसर के साथ ये फेफड़ों को भी कमजोर कर रहा है। फेफड़े कमजोर होने पर कोरोना संक्रमण खतरनाक हो सकता है यानी जान भी जा सकती है। कई मामले ऐसे सामने आ रहे है कोरोना ठीक हो चुका है लेकिन उन्हें अभी सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि 2018 से लेकर 2020 तक प्री कैंसर के 940 केस सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को माने तो रोजाना प्री कैंसर के दो केस सामने आ रहे हैं जो कि मुंह के कैंसर की चपेट में आ चुके हैं। इसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी शामिल हैं। नागरिक अस्पताल में काउंसलिंग के द्वारा धुम्र-पान छुड़वाकर प्री-कैंसर को आगे बढ़ने से रोका जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2018 से मार्च 2019 तक 560 तथा अप्रैल 2019 से मार्च 2020 तक 380 प्री-कैंसर के केस सामने आ चुके हैं।
30 फीसदी महिलाएं प्री कैंसर की चपेट में
डॉक्टरों के मुताबिक समय रहते तंबाकू छोड़कर प्री-कैंसर पर कंट्रोल किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों से प्री-कैंसर की चपेट में आने के केस सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। इसमें करीब 30 फीसदी महिलाएं भी शामिल हैं। नागरिक अस्पताल के दंत रोग विशेषज्ञ मेजर डॉ. शरद तुली बताते हैं कि ओपीडी में दांत व मसूड़ों में दर्द को लेकर ऐसे मरीज पहुंचते हैं। जांच के दौरान इनमें प्री-कैंसर के लक्षण पाए जाते हैं। रोजाना करीब दो केस सामने आते हैं। धुम्र-पान के कारण मरीज के मुंह में सफेद और काले रंग का निशान हो जाता है इसके अलावा तालू जल जाता है और दांत तथा मसूड़ों में दर्द होता है। थूक बनना भी कम हो जाता है और मुंह भी नहीं खुल पाता जबकि मुंह कम से कम तीन से चार उंगली तक खुलना चाहिए। ये प्री-कैंसर की निशानी है। मरीज को काउंसलिंग के द्वारा तंबाकू छुड़वाया जाता है और कुछ दिनों की दवाई देकर बार-बार काउंसलिंग की जाती है।
जिले में सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान के ये काटे गए चालान
वर्ष चालान
2018 - 513
2019 - 442
2020 - 114
2021 - 26
कोट
जब भी धुम्र-पान या फिर गुटखा खाने का मन करें तो तीन से चार गिलास पानी पीना चाहिए। अच्छा खाना लेना चाहिए। आमतौर पर धुम्र-पान रोकने के लिए इलायची या फिर सौंफ को कहा जाता है जो कि गलत है, इसके बाद मरीज इसका आदी हो जाता है।
- मेजर डॉ. शरद तुली, दंत चिकित्सक, नागरिक अस्पताल।
कोट
तंबाकू फेफड़ों को कमजोर बना देता है, इसके कारण सांस लेने में दिक्कत होती है। अगर कोरोना संक्रमण हो जाता है उन्हें ठीक होने में समय लगता है। कई बार मौत भी हो जाती है। अब कई मरीज आ रहे हैं उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है, इसके पीछे मुख्य कारण ये ही है कि इनके फेफड़े कमजोर हो चुके हैं। लोग अच्छी डाइट लें और पानी पीएं।
- डॉ. मनीष टुटेजा, फीजिशियन।